Rajasthan News: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर घमासान छिड़ गया है. जहां एक ओर राज्य सरकार की ओर से OBC रिपोर्ट आने तक इंतजार करने की बात कही जा रही है. जबकि चुनाव आयोग बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने की दलील दे रही. यानी सरकार और आयोग के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है. वहीं अब प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव का विवाद एक बार फिर हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंचने वाला है.
सरकार और आयोग को लीगल नोटिस
राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का चरणबद्ध कार्यक्रम जारी किया, जिसमें 22 अप्रैल तक अंतिम सूची जारी करने का समय निर्धारित है. इसी को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक और हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता रहे संयम लोढ़ा ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को लीगल नोटिस भेजा है.
नोटिस में उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 14 नवंबर के आदेश से प्रदेश में पंचायत व निकाय चुनाव 15 अप्रैल से पहले कराने के निर्देश दिए थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा. लेकिन आयोग का नया कार्यक्रम स्पष्ट करता है कि 15 अप्रैल से पहले निकाय चुनाव संपन्न नहीं होंगे.
सरकार और आयोग के खिलाफ दायर होगी अवमानना की याचिका
नोटिस में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि इससे राज्य चुनाव आयोग और सरकार हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रही है, जो अदालत की अवमानना है. उन्होंने आयोग से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कार्यक्रम को संशोधित कर 15 अप्रैल के अनुरूप फिर से जारी करने की अपील की है. यदि ऐसा न किया गया, तो वे हाई कोर्ट में आयोग व सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करेंगे.
पूर्व विधायक ने राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह, सचिव राजेश वर्मा, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस भेजा है.
राजस्थान हाई कोर्ट ने 14 नवंबर को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक पंचायत व निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. साथ ही 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा था. इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भी 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का निर्देश दोहराया था.
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