रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर राजस्थान की लोक संस्कृति और अटूट आस्था का एक अनूठा संगम देखने को मिला. सीकर से करीब 50 श्रद्धालुओं का एक दल जलती सिगड़ी लेकर दंडवत यात्रा करते हुए रामदेवरा पहुंचा. इस यात्रा की सबसे खास बात श्रद्धालुओं द्वारा जलती हुई सिगड़ी लेकर चलना रही, जो रास्ते भर लोगों के लिए भारी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही.
कठिन तप और भक्ति का मार्ग
दंडवत यात्रा पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. श्रद्धालुओं ने सीकर से रामदेवरा तक की लंबी दूरी दंडवत परिक्रमा (लेटकर यात्रा) करते हुए पूरी की. डीजे पर बजते बाबा के भजनों और कीर्तनों के बीच भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था.
होली के रंगों में सराबोर हुए भक्त
होली का अवसर होने के कारण यात्रा का माहौल पूरी तरह उत्सवमय था. भक्तों ने एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. बाबा रामदेव की समाधि पर मत्था टेककर विशेष पूजा-अर्चना की. देश में सुख, शांति और खुशहाली की कामना के लिए विशेष अरदास की.
मन्नत पूरी होने पर सपरिवार पहुंचे श्रद्धालु
पदयात्रियों ने बताया कि यह उनकी मन्नत पूरी होने पर वे सपरिवार दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार पहुंचे. होली के दिन अपनी इस कठिन यात्रा को सकुशल पूरा करने पर भक्तों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी. समाधि परिसर के पास गुजरात और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी जमकर होली खेली. पूरे रामदेवरा क्षेत्र में बाबा के जयकारों और होली के गीतों के साथ भक्तों में भारी जोश देखने को मिला.
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