Rajasthan News: पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने न केवल वैश्विक राजनीति को हिला दिया है, बल्कि विदेशों में घूमने गए पर्यटकों के लिए भी जान का जोखिम पैदा कर दिया है. इसी खौफनाक मंजर का सामना कर राजस्थान के सीकर जिले के एडवोकेट पीयूष शर्मा सकुशल अपने घर लौटे हैं. रविवार को जब वे अपने घर पहुंचे, तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे और पीयूष के चेहरे पर एक भयावह युद्ध क्षेत्र से निकलकर आने की राहत.
सैर-सपाटे के बीच अचानक गूंजा अलर्ट का सायरन
पीयूष शर्मा अपने दोस्तों, राकेश और अजय के साथ 25 फरवरी को दुबई घूमने गए थे. शुरुआती दो दिन(26 और 27 मार्च ) सब कुछ सामान्य था, लेकिन 28 फरवरी की एक दोपहर ने सब बदल दिया. पीयूष ने बताया कि हम बीच (समुद्र तट) पर टहल रहे थे कि अचानक स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया. लाउडस्पीकर पर तुरंत वहां से हटने और सुरक्षित ठिकानों पर जाने के निर्देश दिए गए. हम तुरंत अपने फ्लैट लौट आए और फिर फ्लैट पर पहुंचने के बाद जब टीवी न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर हमलों की खबरें देखीं तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगा.अगले 3 दिनों तक में डर के कारण फ्लैट से बाहर निकलना बंद कर दिया.

400 मीटर की दूरी पर धुआं
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आंखों के सामने ड्रोन हमला
दुबई में फंसे उन 72 घंटों की आपबीती सुनाते हुए पीयूष की रूह कांप उठी. उन्होंने बताया कि 4 मार्च को उनके फ्लैट से महज 400-500 मीटर की दूरी पर एक जोरदार धमाका हुआ. खिड़की से बाहर झांकने पर सामने की एक इमारत के पीछे से काला घना धुआं उठ रहा था.यह एक ड्रोन हमला था. इसके बाद प्रशासन ने सख्त हिदायत दी कि कोई भी खिड़की-दरवाजे न खोले और बाहर निकलना पूरी तरह बंद कर दे।
20 हजार की टिकट के लिए चुकाए 80 हजार रुपए
हालात इतने बिगड़ चुके थे कि अधिकांश फ्लाइट्स रद्द थीं और जो उपलब्ध थीं, उनका किराया आसमान छू रहा था. पीयूष ने बताया कि वतन वापसी के लिए उन्हें सामान्य से चार गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ी. जिस सफर का किराया अमूमन 20 हजार होता है, उसके लिए उन्होंने 80 हजार रुपए दिए.उनके परिवार का भी यही कहना था-"पैसे की चिंता मत करो, बस सही-सलामत घर लौट आओ.
मददगार बना 'मारवाड़ी ग्रुप' और जनप्रतिनिधि
पीयूष ने बताया कि जब दुबई में हमलों की खबरें आने लगीं, तो उन्होंने तुरंत अपने भाई डॉ. संजय शर्मा से कॉन्टैक्ट किया और उन्हें वहां के हालात के बारे में बताया. इसके बाद उनके भाई ने सीकर के धोद MLA गोरधन वर्मा समेत कई लोगों से मदद मांगी. इसके चलते उन्हें सीकर के लोगों और दुबई में रहने वाले मारवाड़ियों के ग्रुप में जोड़ा गया. जहां पल-पल की सुरक्षा अपडेट, खाने-पीने की व्यवस्था और सुरक्षित रास्तों की जानकारी दी जा रही थी. इसी तालमेल की बदौलत पीयूष और उसके दोस्तों ने फ्लाइट का टिकट बुक किया. शनिवार रात को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीकर में अपने घर पहुंचे.
पैसों से ज्यादा बेटा जरूरी - पीयूष का परिवार
वही सीकर में लगातार उनका परिवार उनकी और उनके दोस्तों की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहा था. पीयूष के भाई ने बताया कि जब उसने वहां के हालातों के बारे में बताया तो परिवार काफी चिंतित हो गया था.उन्होंने उसे तुरंत पैसों की चिंता किए बिना सुरक्षित घर लौटने की बात कही. अब जब वह सुरक्षित घर लौट आए हैं तो पूरे परिवार ने राहत की सांस ली है.
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