Isarda Dam Project: पूर्वी राजस्थान की महत्वाकांक्षी ईसरदा बांध परियोजना को समय सीमा में पूरा करने के लिए सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. शनिवार को इसी का जायजा लेने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने टोंक जिले का दौरा किया. जिसमें उन्होंने बनास नदी पर बन रहे ईसरदा बांध परियोजना के निर्माण कार्यों का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया. इस दौरान टोंक जिले की नई कलेंक्टर टीना डाबी भी उनके साथ रही.
कलेक्टर्स ने किया स्वागत, अधिकारियों के साथ हुई गहन चर्चा
मुख्य सचिव के ईसरदा बांध परियोजना कार्यालय पहुंचने पर टोंक की नवनियुक्त कलेक्टर टीना डाबी और सवाई माधोपुर कलेक्टर कानाराम ने उनकी अगवानी की. इसके बाद, मुख्य सचिव दोनों जिलों के जिला कलेक्टरों के साथ एक अनुभवी परीक्षक की तरह बांध का दौरा करने पहुंचे. इस दैरान मुख्य सचिव काफी सजग दिखे. उन्होंने परियोजना से जुड़े अभियंताओं और अधिकारियों के साथ बांध का बारीकी के साथ निरीक्षण किया. जिसके बाद एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली. बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना की अब तक की प्रगति की जानकारी ली और निर्माण कार्य में आ रही तकनीकी व प्रशासनिक बाधाओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए.
मौके पर पहुंचे मुख्य सचिव, दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव सीधे बांध के निर्माण स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने चल रहे कंक्रीट कार्य, पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया और अन्य निर्माण गतिविधियों का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि कार्य की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न किया जाए और इसे निर्धारित समय में पूरा किया जाए ताकि टोंक, सवाई माधोपुर और दौसा के निवासियों को जल्द से जल्द पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.
दौसा और सवाई माधोपुर जल्द पहुंचेगा बनास का पानी
ईसरदा बांध पर हुए औचक नीरीक्षण के बाद से टोंक और सवाई माधोपुर के आसपास के जिलों में दशकों पुराने जल संकट को खत्म होने की आस तेज हो रही है. मुख्य सचिव के शनिवार को ईसरदा बांध परियोजना के उच्च स्तरीय निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि अब वह दिन दूर नहीं, जब दौसा और सवाई माधोपुर के घर-घर में बनास का शुद्ध पानी पहुंचेगा. इसके जरिए दौसा जिले के लगभग 1,000 गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा. वही सवाई माधोपुर के शुरुआती चरणों में 177 गांवों को इस योजना से सीधा लाभ मिलेगा. परियोजना के तहत 225 एमएलडी (MLD) क्षमता का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और सैकड़ों किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन पाइपलाइन बिछाई गई है, ताकि 'हर घर जल' का सपना सच हो सके.
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