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कोल्ड ड्रिंक में मिला प्लास्टिक का टुकड़ा, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर ठोंका लाखों का जुर्माना

जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से माजा कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी. पर सीलबंद बोतल में प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई चीज नजर आई. 

कोल्ड ड्रिंक में मिला प्लास्टिक का टुकड़ा, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर ठोंका लाखों का जुर्माना
कोल्ड ड्रिंक में मिला प्लास्टिक का टुकड़ा

Rajasthan News: खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कंपनी को कड़ा सबक सिखाया है. माजा (Maaza) कोल्ड ड्रिंक की सीलबंद बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा मिलने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी और विक्रेताओं पर कुल 2.50 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. साथ ही आयोग ने परिवादी को क्षतिपूर्ति रकम के तौर पर 40 हजार रुपये और परिवाद लड़ने में हुए खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया है. 

माजा की बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा

दरअसल, 16 जुलाई 2025 को जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से माजा कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी. जब उन्होंने बोतलों की जांच की तो वह यह देखकर दंग रह गए कि माजा कोल्ड ड्रिंक की बोतल पूरी तरह सीलबंद थी, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई चीज नजर आई. 

इस पर ताषर ने स्वास्थ्य के साथ इसे खिलवाड़ लापरवाही मानते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी ने वह सीलबंद बोतल साक्ष्य के तौर पर आयोग के सामने पेश की. आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गोड की पीठ ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद गुणवत्ता में कमी गंभीर लापरवाही है. निरीक्षण में कोल्ड ड्रिंक की बोतल के अंदर बाहरी पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई.

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परिवादी को 40 हजार रुपये देने का आदेश

साक्ष्यों और बहस के आधार पर आयोग ने 9 अप्रैल 2026 को कंपनी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया. आयोग ने कंपनी को परिवादी को 40,000 रुपए क्षतिपूर्ति राशि और 10,000 रुपए परिवाद व्यय देने के निर्देश दिए. साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में गंभीर कमी को देखते हुए 2 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश भी दिया गया. परिवादी के अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

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