जैसलमेर के लाठी कस्बे में इंसान और वन्यजीवों के बीच संवेदनशील रिश्ते की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली. एक बंदर ने सड़क हादसे में दम तोड़ दिया तो ग्रामीणों ने उसे सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी. शनिवार (14 जून) दोपहर मुख्य बाजार में सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से नर वानर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई.
ग्रामीणों ने निकाली शव यात्रा
वन्य जीव संरक्षण के काम करने वाले युवा विक्रम दर्जी और उनकी टीम ने बंदर की शव यात्रा भी निकाली. शव यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और श्रद्धापूर्वक वानर को अंतिम विदाई दी. शवयात्रा को जगदम्बा माता मंदिर के पास उस स्थान तक ले जाया गया, जहां कुछ समय पहले एक मादा वानर की समाधि बनाई गई थी. यह दृश्य कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा.
मादा वानर की समाधि के पास बंदर को दफनाया
ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि नर वानर को भी उसकी साथी मादा वानर की समाधि के पास ही दफनाया जाएगा. करीब 20 फीट गहरा गड्ढा खोदकर गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित की गईं और परंपरा के अनुसार नमक डालकर समाधि दी गई. इस दौरान खुशाल सेन, भोमराज देवड़ा, नरपतराम देवड़ा, ओमप्रकाश दर्जी, पवन पंवार, गेपरराम भील समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे.
दोनों की सड़क दुर्घटना में ही मौत
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह जोड़ा पिछले कई वर्षों से लाठी कस्बे में साथ रह रहा था. 16 मई को मादा वानर की भी सड़क हादसे में मौत हो गई थी. अब उसी क्षेत्र में 13 जून को नर वानर की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. ग्रामीण इसे दोनों के अटूट साथ का प्रतीक मान रहे हैं. लोगों का कहना है कि जीवनभर साथ रहने वाला यह जोड़ा मौत के बाद भी एक-दूसरे से अलग नहीं हुआ.
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