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पुलिस पर 70 लाख की रिश्वत का आरोप, राजस्थान हाई कोर्ट ने खोली जांच की फाइल, अब होगी कड़ी कार्रवाई!

जोधपुर हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून से कोई भी बच नहीं सकता, चाहे वह अपराधी हो या पुलिस की वर्दी में.

पुलिस पर 70 लाख की रिश्वत का आरोप, राजस्थान हाई कोर्ट ने खोली जांच की फाइल, अब होगी कड़ी कार्रवाई!
जोधपुर: डोडा-पोस्त तस्करी मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, तीन पुलिसकर्मियों पर जांच जारी रहेगी

Rajasthan News: राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने शुक्रवार शाम मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक मामले (Drug Trafficking Case) में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने तीन पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) जारी रखने का आदेश दिया है. इस फैसले से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.

दरअसल, जस्टिस फरजंद अली की अदालत ने 20 अगस्त 2025 को अपने फैसले में इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल स्वरूप राम और कांस्टेबल जोहरा राम के आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी. कोर्ट ने इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया था. इसी के साथ, कोर्ट ने इस मामले के मुख्य आरोपी सत्यनारायण को जमानत भी दे दी थी, क्योंकि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला था.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जनवरी 2023 का है, जब बासनी थाने के तत्कालीन SHO जितेंद्र सिंह और उनकी टीम ने एक ट्रक-टैंकर (RJ09-GD-2612) से भारी मात्रा में डोडा-पोस्त की जब्ती की थी. जब्त की गई मात्रा 2240 किलोग्राम से अधिक थी. पुलिस ने मौके से ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने बताया था कि उसे यह माल सत्यनारायण के घर पर उतारने का निर्देश मिला था. इसी बीच, सत्यनारायण के बेटे मुकेश सुथार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज कराई थी. उसने आरोप लगाया कि उसके पिता को इस मामले से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने 70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. बाद में यह रकम 35 लाख रुपये तय हुई, जिसे हेड कांस्टेबल स्वरूप बिश्नोई को दिया गया था.

सीसीटीवी फुटेज से खुला 'राज'

मुकेश सुथार के आरोपों को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया और इस मामले में जांच के आदेश दिए. जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. फुटेज से पता चला कि पुलिस ने ट्रक को पहले किसी और जगह पर रोका था, जबकि रिकॉर्ड में उसकी बरामदगी थाने के सामने दिखाई गई. कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताई.

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर कानून के रखवाले ही अपराधियों जैसा व्यवहार करेंगे तो जनता का पुलिस से विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा. विस्तृत जांच के बाद अदालत ने पाया कि तीन पुलिसकर्मियों- इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल स्वरूप राम और कांस्टेबल जोहरा राम- की भूमिका बेहद संदिग्ध थी. हालांकि, इसी मामले में शामिल अन्य पुलिस अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई, क्योंकि उनकी भूमिका सामान्य पाई गई थी.

आरोपी को जमानत, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

अदालत ने आरोपी सत्यनारायण को जमानत देते हुए कहा कि उसके खिलाफ कोई सीधा और पुख्ता सबूत नहीं है. उसका नाम केवल ट्रक ड्राइवर के बयान पर आया है, जो कि एक सह-आरोपी है. कोर्ट ने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना सही नहीं होगा. इसलिए, सत्यनारायण को 50000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों की शर्त पर जमानत दी गई. इस आदेश के साथ, कोर्ट ने आदेश की एक प्रति राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजने का निर्देश दिया, ताकि इन तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून से कोई भी बच नहीं सकता, चाहे वह अपराधी हो या पुलिस की वर्दी में.

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