Rajasthan News: राजस्थान के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) का 17वां दीक्षांत समारोह एक बेहद हैरान करने वाले विवाद के चलते चर्चा में आ गया है. जिस समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कानून मंत्री जोगाराम पटेल जैसी हस्तियां मौजूद थीं वहां एक मेधावी छात्र के साथ हुई घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एलएलएम (आईपीआर) के छात्र अनुज शुक्ला ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उन्हें टॉपर घोषित करने और ब्रोशर में नाम छापने के बाद समारोह शुरू होने से ऐन पहले गोल्ड मेडल देने से मना कर दिया गया.
अचानक बदला फैसला और उठा विवाद
छात्र अनुज शुक्ला का कहना है कि उनकी कड़ी मेहनत के बाद गोल्ड मेडल कमेटी और अकादमिक काउंसिल ने उन्हें दो गोल्ड मेडल देने की सिफारिश की थी. दीक्षांत समारोह की आधिकारिक पुस्तिका में भी उनका नाम शामिल किया गया था. लेकिन समारोह से महज पांच मिनट पहले अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि पुनर्मूल्यांकन के चलते अब उन्हें मेडल नहीं मिलेंगे. छात्र ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का मौका दिए यह फैसला लिया.
पुनर्मूल्यांकन पर गंभीर सवाल
अनुज ने याचिका में बताया कि उन्होंने प्रथम सेमेस्टर में 'रिसर्च मेथोडोलॉजी' विषय की उत्तरपुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था. छात्र का दावा है कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक अंतर होने पर ही नए अंक प्रभावी होते हैं. हालांकि उनके अंक 82 से घटाकर 65 कर दिए गए और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा. छात्र ने अदालत से मामले की न्यायिक जांच और गोल्ड मेडल आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है. मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी.
यह भी पढ़ें-
कान्स के रेड कारपेट पर मारवाड़ की डॉक्टर ने बिखेरा जलवा, जोधपुर की सोनल परिहार चर्चा में