जेजेएम घोटाले में ACB कोर्ट ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी और संजय बडाया की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. मामले की सुनवाई करते हुए जज राजेश दडिया ने टिप्पणी की कि आरोपी ने मंत्री पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग कर अपराध किया, जो आमजन के विश्वास के साथ गंभीर विश्वासघात है. ऐसे मामलों में जमानत देना उचित नहीं है.
"ऊंची दरों पर टेंडर जारी करवाए"
कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि महेश जोशी ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए सह-आरोपियों के साथ मिलकर अपने प्रभाव का उपयोग किया, और ऊंची दरों पर टेंडर जारी करवाए. ईरकॉन कंपनी के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया. साथ ही, वित्त समिति और बीईसी पर नियंत्रण होने के बावजूद ऐसे निर्णय लिए गए, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ.
संजय बडाया तक गोपनीय जानकारी पहुंची
एसीबी ने यह भी पाया कि आरोपी ने रिश्वत की राशि प्राप्त की. इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत अपराध मानते हुए उनके खिलाफ चालान पेश किया गया है. संजय बडाया के संबंध में कोर्ट ने कहा कि चालान में सामने आया है कि उसकी तत्कालीन मंत्री से नजदीकी थी और उसे विभाग की गोपनीय जानकारी तक पहुंच थी.
3 हजार पृष्ठों का चालान पेश किया
इस मामले में जल जीवन मिशन में कथित घोटाले के आरोपों की जांच जारी है. जलदाय विभाग से जुड़े मामले में एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी और उनके सहयोगी रहे संजय बडाया के खिलाफ करीब 3 हजार पृष्ठों का चालान पेश किया है.
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर जारी किए
एसीबी के अनुसार, महेश जोशी विभाग के मुखिया होने के कारण पूरी जवाबदेही उनकी थी. इसके बावजूद उनके कार्यकाल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर जारी किए गए. जांच के दौरान सामने आए ट्रांसक्रिप्ट में संजय बडाया का नाम भी सामने आया है, जिससे उसकी भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है. इसी केस में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, और उनके खिलाफ लगभग 17,500 पन्नों की चार्जशीट दायर की गई है.
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