केलवाड़ा वन क्षेत्र से सटे कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है. भारतीय मूल की मादा चीता 'मुखी' ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म देकर न केवल कूनो बल्कि पूरे देश को गौरव से भर दिया है. कूनो प्रबंधन के अनुसार, मां और सभी शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं. यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पहली बार है, जब भारत में जन्मी किसी मादा चीता ने देश की ही जमीन पर सफल प्रजनन किया है.
एक स्वाभाविक प्रजनन उछाल है
वन विभाग एवं वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो यह एक स्वाभाविक प्रजनन उछाल है, जो किसी भी पुनर्वास परियोजना की सबसे कठिन एवं सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे अहम कसौटी होती है. यह बड़ी उपलब्धि संकेत देती है कि भारत अब आत्मनिर्भर चीता जनसंख्या के लक्ष्य के बेहद करीब है, इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी, साथ ही भविष्य की चीता पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार होगा. वैश्विक वन्यजीव संरक्षण में भारत की स्थिति और मजबूत होगी.
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से से लाए गए थे चीता
भारत में चीतों का कुनबा बढ़ाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) में 17 सितंबर 2022 को 8 चीतों (5 मादा और 3 नर) को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था. जो नामीबिया से लाए गए थे. यह भारत में चीतों की पुनः प्रस्तुति का हिस्सा था, जो लगभग 70 वर्षों बाद देश में वापस लाए गए थे, जिसके चलते पहला बैच (नामीबिया से) 8 चीतें (5 मादा, 3 नर) - 17 सितंबर 2022 को दूसरा बैच (दक्षिण अफ्रीका से): 12 चीतें - 18 फरवरी 2023 को लाये गये थे.
कूनों में कुल 24 चीते हैं
वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में 12 वयस्क और 12 शावक कुल 24 चीते हैं. अब और इन पांच शावकों के जन्म लेने से इन चीतो का कुनबा बढ़ा है, तो साथ ही चीतों का और अधिक कुनबा बढ़ाने की दृष्टि से 20 अप्रैल 2025 को कुन्नो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव संरक्षण पार्क में नर व मादा चीतो का स्थानांतरण किया गया था.