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This Article is From Dec 28, 2023

ओडिशा के कोणार्क मंदिर की तरह कोटा में भी है सूर्य मंदिर, जल्द ही पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित

लोक सभा स्पीकर ओम बिरला के प्रयासों से केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा बूढ़ादीत के सूर्य मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. सूर्य मन्दिर पुरातत्‍व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा संरक्षित स्‍मारक है.  

ओडिशा के कोणार्क मंदिर की तरह कोटा में भी है सूर्य मंदिर, जल्द ही पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित
9वीं शताब्दी का बूढ़ादीत में स्थित सूर्य मंदिर नागर शैली में बना है.
कोटा:

Surya Mandir Budhadeet: लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा को पर्यटन के क्षेत्र में एक और सौगात मिलेगी. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने बूढ़ादीत के सूर्य मंदिर (Surya Mandir Budhadeet) को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से चिन्हित किया है. मंत्रालय ने राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग को पत्र लिख कर इसके लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाने के निर्देश दिए हैं.

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का मानना है कि कोटा समेत सम्पूर्ण हाड़ौती क्षेत्र गौरवशाली विरासत से समृद्ध हैं. यह विरासत बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं. परन्तु इनके आसपास मूलभूत सुविधाओं के विकास तथा इनको वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने के लिए अब तक गंभीर प्रयास नहीं हो सके हैं.

ढलते हुए सूर्य के प्रतीक बूढ़-आदित्य के कारण ही इस जगह का नाम बूढ़ादीत पड़ा है. नागर शैली में बना यह मंदिर झालरापाटन के सूर्य मंदिर से भी पुराना है.

इसको देखते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को कोटा-बूंदी के अनेक ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देकर वहां विभिन्न योजनाओं के तहत विकास करवाने को कहा है. इसी के तहत बूढ़ादीत के सूर्य मंदिर को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना के तहत धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है.

बूढ़ादीत के सूर्य मंदिर

बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर

9वीं शताब्दी का है सूर्य मंदिर

कोटा से करीब 55 किमी दूर बूढ़ादीत में स्थित सूर्य मंदिर नागर शैली में बना हुआ है. यह एक हजार से अधिक वर्ष पुराना है. मंदिर का निर्माण किसने करवाया इसकी अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. लेकिन ढलते हुए सूर्य के प्रतीक बूढ़-आदित्य के कारण ही इस जगह का नाम बूढ़ादीत पड़ा है. नागर शैली में बना यह मंदिर झालरापाटन के सूर्य मंदिर से भी पुराना है. अभी इसका संरक्षण राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है. मंदिर के पास एक कुण्ड भी है, जो भी उसी समय का है.

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन यह स्मारक 9 वीं 10 वीं शताब्दी पुराना है. कलात्मक, शिल्प युक्त मंदिर हाड़ौती क्षेत्र के प्राचीनतम सूर्य मंदिरों में से एक है. यहां उमा- महेश्वर, लक्ष्मी नारायण, ब्रह्मा सावित्री एवं गणेश, रेवती-बलराम और भगवान कार्तिकेय के साथ सूर्य उकेरा हुआ है.


केशवरायपाटन मंदिर का भी हो रहा विकास

स्पीकर बिरला के प्रयासों से ही केशवरायपाटन स्थित भगवान केशवराय जी के मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. वहां चंबल नदी के किनारे का भी रिवर फ्रंट के रूप में विकास किया जाएगा. इसकी डीपीआर तैयार हो गई है, जल्द ही वहां कार्य प्रारंभ हो जाएगा.

 स्पीकर बिरला ने सुनी आमजन की समस्याएं

आमजन की समस्याएं सुनते स्पीकर बिरला

स्पीकर बिरला ने सुनी आमजन की समस्याएं

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरूवार को संसदीय क्षेत्र के पांच दिवसीय प्रवास पर कोटा पहुंचे. उन्होंने गुरूवार दोपहर लोक सभा कैम्प कार्यालय में आमजन से भेंट की. इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को यथा संभव समाधान के निर्देश दिए.

सहायता के लिए गुहार

स्पीकर बिरला से मिलने के लिए संसदीय क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे. किसी ने विकास कार्यों के लिए स्पीकर बिरला से आग्रह किया तो किसी ने उपचार में सहायता के लिए गुहार लगाई, तो किसी ने व्यक्ति कार्य के लिए मदद मांगी. स्पीकर बिरला ने सबकी बात को संवेदनशीलता से सुना.

इस दौरान बिरला ने कहा कि संसदीय क्षेत्र के लोग उनके लिए परिवार के सदस्य हैं. उनसे मुलाकात कर एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है. जो उनके लिए समर्पित भाव से कार्य करने को प्रेरित करती है.

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