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Rajasthan Lok Sabha Election 2024: राजस्थान में दूसरे चरण की 13 सीटों पर कौन मारेगा बाजी? वोटिंग से समझिए कहां किसका पलड़ा भारी

Rajasthan Lok Sabha Chunav 2024: राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर वोटिंग पूरी हो गई है. अब सिर्फ 4 जून को मतदान परिणामों का इंतजार है.

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Rajasthan Lok Sabha Election 2024: राजस्थान में दूसरे चरण की 13 सीटों पर कौन मारेगा बाजी? वोटिंग से समझिए कहां किसका पलड़ा भारी

Rajasthan Election 2024: राजस्थान में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में शुक्रवार को 13 सीटों पर हुई वोटिंग (Rajasthan Vote Share 2024) का फाइनल आंकड़ा 64.56% फीसदी रहा है. ये पहले चरण से करीब 6 फीसदी ज्यादा है. लेकिन सभी 25 सीटों की बात करें तो मतदान 61.60 प्रतिशत रहा, जो पिछले 2019 के चुनाव के 67.75 प्रतिशत से 5.11 फीसदी कम रहा है. राजस्थान में पहले चरण में 12 सीटों पर 57.87 फीसदी वोटिंग हुई थी. लेकिन ये आंकड़ा भी दिलचस्प है कि साल 2019 में लोकसभा चुनाव में पहले चरण की 13 सीटों पर 29 अप्रैल को 68.22 प्रतिशत वोटिंग हुई. वहीं, 6 मई को दूसरे चरण की 12 सीटों पर 63.78 प्रतिशत मतदान रहा. प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए कुल 66.12 प्रतिशत वोटिंग हुई. 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश में 25 सीटों पर 63.10 वोटिंग हुई थी.

बाड़मेर में सबसे ज्यादा वोटिंग

असल में राजस्थान में दूसरे चरण में जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालोर, राजसमंद, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा, टोंक-सवाई माधोपुर, कोटा, झालावाड़-बारां सीट पर वोटिंग हुई है. इन सीटों की बात करें तो सबसे इंटरेस्टिंग चुनाव बाड़मेर-जैसलमेर और बांसवाड़ा डूंगरपुर में हुआ है. बाड़मेर सीट (Barmer Lok Sabha Seat) पर सबसे ज्यादा 74.25 फीसदी वोट पड़े. इसकी वजह त्रिकोणीय मुकाबला था, जो मतदान के दिन तक आते आते कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार की सीधी टक्कर में तब्दील हो गया था. 

मुसलमान वोटर डिजाइडेड फैक्टर

इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र सिंह भाटी (Ravindra Singh Bhati) और कांग्रेस के उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल (UmmedaRam Beniwal) के बीच कड़ा मुकाबला है. भाजपा के प्रत्याशी केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी (Kailash Choudhary) मतदान के दिन तक आते-आते पिछड़े हुए दिखाई दिए हैं. इस सीट पर एक-एक वोट के लिए संघर्ष हुआ, लेकिन ग्राउंड पर जो दिखा उससे साफ है कि 'पार्टियों' से ज्यादा इस सीट पर 'जाति' का चुनाव हुआ है. जाट राजपूत वोट बैंक में सेंधमारी के अलावा इस सीट पर मुसलमान एक बड़ा डिजाइडेड फैक्टर रहने वाला है.

बांसवाड़ा का अनुमान लगाना मुश्किल

आदिवासी इलाके की बांसवाड़ा लोकसभा सीट (Banswara Lok Sabha Seat) पर भी रविंद्र सिंह भाटी की तरह राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) के रूप में नए नायक का उदय हुआ है. बांसवाड़ा सीट पर 72.77 फीसदी मतदान हुआ. इसकी वजह बाप पार्टी के रोत और भाजपा में महेंद्रजीत सिंह मालवीय (Mahendrajeet Singh Malvaiya) के बीच सीधा मुकाबला होना है. कांग्रेस का यहां बीएपी पार्टी से गठबंधन होने के बाद भी उनका प्रत्याशी अरविंद डामोर चुनावी मैदान में डटे रहना भी हैरानी भरा रहा. यहां के लोगों का मानना है कि कभी कांग्रेस के गढ़ रहे इस बेल्ट में बीएपी पार्टी ने उसकी जगह ले ली है. यहां मुकाबला आदिवासी और गैर आदिवासी वोटों का हो गया है. यहां टक्कर इतनी कड़ी है कि कुछ भी अनुमान लगाना मुश्किल है.

'कोटा में ओम बिरला का पलड़ा भारी'

इसी तरह कोटा-बूंदी (Kota Lok Sabha Seat) की सीट जो शुरू में एकतरफा लग रही थी, कांग्रेस की टिकट पर प्रहलाद गुंजल (Prahlad Gunjal) के ताल ठोकने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) के लिए इस सीट पर जीत की राह आसान नजर नहीं आती है. 70.82 फीसदी का वोटिंग प्रतिशत बताता है कि इस सीट की सियासी जंग में जोर आजमाइश पूरी हुई है. हालांकि सियासी पंडित मानते हैं कि गुंजल के अच्छा चुनाव लड़ने के बाद भी इस सीट पर ओम बिरला का पलड़ा भारी है. असल में इस सीट को हिंदुत्ववादी सीट माना जाता है. यही वजह है कि बिड़ला पिछले दो बार से दो लाख से अधिक मतों से जीतते आए हैं. कांग्रेस के मूल वोटर के साथ गुर्जर मीणा के जातीय समीकरणों के बाद भी ये मार्जिन पाटना आसान नहीं है.

सिरोही का मतदान % बता रहा माहौल

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) की वजह से इस बार जालोर सिरोही सीट (Jalore Lok Sabha Seat) भी हॉट बन गई थी. इस सीट पर मतदान 62.28 फीसदी हुआ जो बता रहा है कि इस बार यहां चुनावी माहौल बना है. लेकिन यहां पर पिछली बार भाजपा का जीत का 2.61 लाख अंतर कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी है. हालांकि इस इलाके में माली प्रभाव के करीब सवा लाख वोटर के अलावा आठ विधानसभाओं में से चार में कांग्रेस का प्रभाव है. यह सीट भाजपा के प्रत्याशी लुंबा राम के स्थानीय होने के चलते स्थानीय और बाहरी उम्मीदवार का नारा लगा था, लेकिन अशोक गहलोत ने बीएपी पार्टी से समझौता कर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है. 

पायलट के गढ़ में सबसे कम मतदान

13 सीटों में सबसे कम मतदान टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर 56.55 प्रतिशत हुआ है, जो कि कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चिंता का विषय है. सचिन पायलट के गढ़ कहे जाने वाले इस इलाके में कांग्रेस ने हरीश मीणा को चुनावी मैदान में उतारा तो भाजपा ने फिर से सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर भरोसा किया. गुर्जर मीणा बहुल इस सीट पर कम वोटिंग से माना जा रहा है कि जाट-गुर्जर वोटर धर्म संकट में पड़ गया है कि क्या पायलट के कहने पर मीणा को वोट दें? या फिर भाजपा के साथ जाSकर अपना गुर्जर धर्म निभायें. लगता है कि इसी पसोपेश में गुर्जर वोटर वोट डालने नहीं निकला है.

13 सीटों पर किसका पलड़ा भारी?

पहले चरण में कम वोटिंग के बाद पीएम मोदी की अपील के बाद इस बार भाजपा का बूथ मेंनेजमेंट बेहतर नजर आया. कांग्रेस ने भी फंसी हुई सीटों पर वोटिंग बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगाया. अब सवाल ये है कि दूसरे चरण में बढ़े वोट प्रतिशत का लाभ किसे मिलेगा. भाजपा कांग्रेस दोनों के अपने अपने दावे हैं. लेकिन ये भी सच है कि इन 13 सीटों में केवल पांच सीट बाड़मेर जैसलमेर, बांसवाड़ा, टोंक सवाई माधोपुर, कोटा बूंदी और जालौर सिरोही ही ऐसी है जहां मुकाबला कड़ा है. जबकि अजमेर, भीलवाड़ा,  चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, पाली, जोधपुर और झालावाड-बारां में भाजपा का पलड़ा भारी है.

ये भी पढ़ें:- Explainer: राजस्थान की बाड़मेर लोकसभा सीट पर 'जातिवाद' में बदला 'वर्चस्व की लड़ाई' का संघर्ष!

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