
Migratory birds: झालावाड़ जिले में आजकल प्रवासी पक्षियों का जमघट लगा हुआ है. 7 समुंदर पार करके हुए झालावाड़ के विभिन्न जलाशयों में अठेखिलां करते हुए प्रवासी पक्षियों को देखकर कोई भी रोमांचित हुए भी नहीं रह सकता है. हालांकि प्रवासी पक्षी लंबे समय से यहां आते रहे हैं और कभी-कभी इनकी संख्या काफी कम हो जाती है.

5 से 10 हजार का सफर कर पहुंचे हैं प्रवासी पक्षी
शीत ऋतु के प्रारंभ में आते हैं 150 तरह के प्रवासी पक्षी
विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शीत ऋतु के प्रारंभ से ही झालावाड़ में लगभग 150 तरह के प्रवासी पक्षी आना शुरू हो जाते हैं, जिनकी कुल संख्या कई हज़ारों में होती है. जलाशयों के आसपास इन प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा इन दिनों को देखने को मिल रहा है. इसमें झालावाड़ का खंड्या तालाब, नया झालरापाटन का गोमती सागर, मूंडलिया खेड़ी तथा बड़बेला का तालाब प्रमुख रूप से शामिल है.
हजारों किमी का सफर तय करके आते हैं पक्षी
विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के अनुसार झालावाड़ में आने वाले प्रवासी पक्षी कई हजार किलोमीटर का सफर तय करके यहां आते है, जो यहां वह तीन से चार महीने रुकते हैं और उसके बाद पुनः लौट जाते हैं. उनके अनुसार कई पक्षी ऐसे हैं, जो 5 से 10000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यहां पहुंचते हैं. हिमालय के अतिरिक्त यूरोप व पृथ्वी के अन्य भागों से भी यह प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं.

झालवाड़ में प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार हो रहा है इजाफा
झालावाड़ में आए इन पर प्रजातियों के प्रवासी पक्षी
विशेषज्ञों के अनुसार झालावाड़ और उसके आसपास के विभिन्न जलाशयों पर कॉमन कूट, नार्दन पिनटेल, नार्दन शॉवलर, कॉमन पॉचार्ड, टफ्टेड पॉचार्ड, रेड क्रेस्टेड पॉचार्ड, कॉमन टील, बार हेडेड गूज़, रडी शेल डक, ग्रे लेग गूज़, पालास गल, ग्रेटर फ्लेमिंगो, गे्रट व्हाइट पेलिकन, व्हाइट टेल लेपविंग, येल्लो वाटल्ड लेपविंग, लिटिल ग्रिब, कोटन पिगमि गूज़ व्हिलिंग टील, पेंटेड स्टाॅर्क, ब्लैक स्टाॅर्क, वूली नेक्ड स्टाॅर्क, सेंडपाइपरस, स्टिंट, प्लोवरस, इग्रेट, शिकारी पक्षियों में मार्श हेरियर, ओस्प्रे सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी देखने को मिल रहे हैं.
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