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राजस्थान सरकार और पुलिस को मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस, आर्यन की हुई मौत पर पूछा यह सवाल

दौसा में हुए बोरवेल घटना में आर्यन की मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार और राजस्थान पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.

राजस्थान सरकार और पुलिस को मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस, आर्यन की हुई मौत पर पूछा यह सवाल

NHRC Notice Rajasthan Government: राजस्थान में बच्चों के बोरवेल में गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी है. जिसमें कई बच्चों को बचाया जा सका है लेकिन कई बच्चों की जान भी चली गई है. हाल ही में दौसा में हुए बोरवेल घटना में यहां 5 साल के बच्चे आर्यन की जान चली गई. जबकि उसे बचाने के लिए दो दिन से भी ज्यादा वक्त तक रेस्क्यू किया गया. लेकिन इसके बावजूद आर्यन को बचाया नहीं जा सका. अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान सरकार औऱ राजस्थान पुलिस को नोटिस भेजा है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार (16 दिसंबर) को कहा कि उसने दौसा जिले में 150 फुट गहरे बोरवेल में 56 घंटे तक फंसे रहने से पांच वर्षीय बच्चे की मौत होने की खबरों पर राजस्थान सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया है. नौ दिसंबर को खेत में खेलते समय बालक बोरवेल में गिर गया था.

मीडिया रिपोर्ट पर NHRC ने लिया संज्ञान

एनएचआरसी ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया की खबर का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया है कि 11 दिसंबर को राजस्थान के दौसा जिले में लगभग 56 घंटे तक 150 फुट गहरे बोरवेल में फंसे रहने के बाद पांच वर्षीय बच्चे की मौत हो गई.” आयोग ने कहा, “अगर समाचार की सामग्री सच है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा उठाती है. ऐसा लगता है कि अधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय और केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिनका मकसद बच्चों के खुले/छोड़े गए बोरवेल और ट्यूबवेल में गिरने जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं/घातक दुर्घटनाओं को रोकना है.”

बयान में कहा गया है, “यह स्पष्ट लापरवाही न केवल उनकी (अधिकारियों की) ओर से कर्तव्य की उपेक्षा है, बल्कि लोगों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन भी है.”

दो सप्ताह में मांगा जवाब

बयान में कहा गया है कि आयोग ने राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में मामले के संबंध में दर्ज प्राथमिकी की वस्तु स्थिति, जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और मृतक के परिजनों को अगर मुआवज़ा दिया गया है, तो उसकी जानकारी होनी चाहिये.

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