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This Article is From Jan 18, 2026

VIP नंबरों के घोटाले में FIR पर अधिकारियों ने दी चुनौती, हाइकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

जस्टिस समीर जैन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद राज्य सरकार एवं संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले को 19 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया.

VIP नंबरों के घोटाले में FIR पर अधिकारियों ने दी चुनौती, हाइकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
राजस्थान हाईकोर्ट का फाइल फोटो.

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग से जुड़े तीन अंकों वाले पुराने नंबर को रिटेंशन करने के मामले में सुनवाई हुई.  क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) सुनील सैनी और 10 अन्य की ओर से याचिका दायर की गई है.  याचिका में बताया कि उनके खिलाफ विभाग ने जांच समिति गठित की.  समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं.

 रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पुराने वाहनों के पंजीकरण के नवीनीकरण, 3 अंकों वाले पुराने रज‍िस्‍टर नंबरों के संरक्षण (Retention) और वर्ष 2013 से पूर्व के वाहनों के बैकलॉग डेटा को VAHAN सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं.  इससे कथित रूप से राज्य सरकार को 400 से 600 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हुआ है. 

"अधिकारियों का पक्ष नहीं जाना गया" 

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि ना तो अंतरिम जांच रिपोर्ट और न ही अंतिम रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी अधिकारी को सुनवाई का अवसर दिया गया.  बिना नोटिस, बिना स्पष्टीकरण मांगे, और बिना जवाब सुने रिपोर्ट तैयार कर लेना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है. 

"बिना साक्ष्य के कार्रवाई की गई"

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कोर्ट को बताया कि पूरी कार्रवाई अनुमानों, कयासों और बिना ठोस साक्ष्य के की गई है.  जांच समिति ने जिन तथ्यों के आधार पर राजस्व नुकसान की बात कही है.  उसके लिए ना तो किसी वित्तीय सलाहकार (FA) की रिपोर्ट है, और ना ही किसी वाहन-वार विवरण को सार्वजनिक किया गया है. 

अधिवक्ता ने कहा कि जांच रिपोर्ट में यह भी कहीं स्पष्ट नहीं किया गया कि किस वाहन के संबंध में कितनी राशि का नुकसान हुआ.  किस अधिकारी ने किस नियम का उल्लंघन किया और किस आधार पर आपराधिक मंशा (Criminal Intent) का आरोप लगाया जा रहा है.  

"कोई श्रेणी अस्तित्व में नहीं थी"

वहीं, उन्होंने कहा कि 1989 से पूर्व जारी तीन अंकों वाले रजिस्ट्रेशन नंबरों को कहीं ‘VIP नंबर', कहीं ‘हेरिटेज नंबर' और कहीं ‘फैंसी नंबर' बताकर गंभीर आरोप लगाए हैं.  लेकिन उस समय ऐसी कोई श्रेणी अस्तित्व में ही नहीं थी और सभी वाहन सामान्य क्रम में पंजीकृत किए जाते थे. परिवहन विभाग ने समय-समय पर आदेश जारी कर पुराने पंजीकरण नंबरों के Retention और Transfer की अनुमति दी है.  इसके लिए निर्धारित शुल्क भी वसूला गया है.  ऐसे में यह कहना कि इन नंबरों को नीलाम किया जा सकता था.  इससे सैकड़ों करोड़ रुपए की आय होती, पूरी तरह काल्पनिक और अव्यावहारिक है. 

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