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This Article is From Sep 21, 2024

यदि पितरों को नहीं दे पा रहे पानी, नहीं कर पा रहे श्राद्ध तो कैसे पा सकेंगे पितृदोष से मुक्ति, जानिए पूरी विधि

पितृ पक्ष पितरों का त्योहार है. इसमें पितरों की पूजा की जाती है साथ ही पितृ दोष के लिए भी उपाय किए जाते हैं. आइये जानते है क्या है पितृ दोष और इससे मुक्ति पाने का तरीका क्या है.

यदि पितरों को नहीं दे पा रहे पानी, नहीं कर पा रहे श्राद्ध तो कैसे पा सकेंगे पितृदोष से मुक्ति, जानिए पूरी विधि
प्रतीकात्मक तस्वीर

Pitru Paksha 2024: अगर आप ऐसी जगह पर रहते हैं जहां आपके आसपास कोई सरोवर या तालाब नहीं है और आपको तर्पण करने में परेशानी होती है. अपने पितृ को तर्पण नहीं करने को लेकर आपका मन व्याकुल रहता है. ऐसी स्थिति में और भी कई उपाय हैं जिससे आप अपने घर के पितरों को अर्पण कर अपने घर में शांति सुकून महसूस कर सकते हैं. श्राद्ध पक्ष पितरों का पर्व है, मान्यता के अनुसार इसमें पितरों के नाम से तर्पण करने से पर पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इसमें हमारे घर में त्योहारों के लिए पितृ खुद आते हैं.

क्या है पितृ दोष का संकेत

पितृ दोष कुंडली के कुछ सबसे प्रमुख दोषों में से एक होता है. कुंडली में जब भी सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु बैठ जाए तो पितृ दोष माना जाता है. सूर्य को पिता और चंद्रमा को माता माना गया है. पितृ दोष हो तो इंसान को जीवन में कई परेशानियां आती हैं. जैसे- घर में पैसों की किल्लत बनी रहना, घर में किसी ना किसी सदस्य का अक्सर बीमार रहना, संतान होने या संतान के भविष्य की चिंता हमेशा रहना, कोई भी प्लानिंग का सफल ना होना, ऐसे कई संकेत हैं जो इशारा करते हैं कि कुंडली में पितृ दोष हो सकता है.

पितृ दोष से मुक्ति पाने का तरीका

पंडित रमेश भोजराज त्रिवेद्वी ने बताया कि पितृ दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष को सबसे अच्छा समय माना जाता है. श्राद्ध में धूप दान, तर्पण, पिंड दान और ब्राह्मण भोजन कराने से पितरों को तृप्त किया जाता है. लेकिन आप श्राद्ध या पितृ दोष की शांति नहीं करा पा रहे हैं. तो एक और आसान तरीका है जिससे आप पितृ दोष से मुक्ति पा सकते हैं.

भगवत गीता के पाठ से भी पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है. गीता का वो ज्ञान जो भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में दिया था. इस गीता का 7वां अध्याय पितृ मुक्ति और मोक्ष से जुड़ा है. श्राद्ध पक्ष में गीता के 7वें अध्याय का पाठ किया जाता है. इस अध्याय का नाम है ज्ञान-विज्ञान योग. इस अध्याय का पाठ श्राद्ध में जितना हो सके, उतना करने का प्रयास करें. इससे पितरों को तृप्ति मिलेगी और पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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