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रेलवे की योजना मचा रही है धूम, जोधपुर मंडल के 15 स्टेशनों पर उपलब्ध है 'वोकल फॉर लोकल विजन' स्टॉल

केंद्र सरकार के वोकल फॉर लोकल विजन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादकों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवे ने यह योजना शुरू की है. इस योजना से अकेले जोधपुर मंडल में करीब 77 लाख रुपए की आय हो चुकी है. 

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रेलवे की योजना मचा रही है धूम, जोधपुर मंडल के 15 स्टेशनों पर उपलब्ध है 'वोकल फॉर लोकल विजन' स्टॉल
जोधपुर:

भारतीय रेलवे के 'एक स्टेशन एक उत्पादन' योजना को जोधपुर के स्थानीय उद्यमियों को भी योजना रास आने लगी है. वॉकल फ़ॉर लोकल विजन की इस अनूठे पहल को भारतीय रेलवे आगे बढ़ा रहा है. रेलवे मंत्रालय ने केंद्र सरकार के वोकल फॉर लोकल विजन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादकों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की है.

केंद्र सरकार के वोकल फॉर लोकल विजन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादकों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की है. 'एक स्टेशन एक उत्पाद योजना' जोधपुर के लघु उद्यमियों को रास आने लगी है. इस योजना से अकेले जोधपुर मंडल में करीब  76 लाख रुपए की आय हो चुकी है. 

जोधपुर स्टेशन पर जोधपुरी मोजड़ी की कियोस्क लगाए लघु उद्यमी मोहनलाल ने बताया कि मोजड़ी बनाने का काम हमारा पुश्तैनी है, पहली बार हमने रेलवे स्टेशन पर यह दुकान लगाई है, जिससे हमें काफी फायदा हो रहा है. रेलवे स्टेशन पर जो बाहर के टूरिस्ट आते हैं. वो यहां से खरीदारी करते हैं. और इसे बहुत पसंद भी करते हैं.

मोजड़ी जोधपुर का एक फेमस आइटम भी है. जोधपुरी मोजड़ी एक तरह की जूती है, जो हाथो की कारीगरी का उत्तम उदाहरण है, जो सॉफ्ट और कंफर्टेबल भी होती है, इसे देशी ही नहीं, विदेशी सैलानियों द्वारा भी काफी पसंद किया जाता है.

उद्यमियों को आर्थिक संबल और कॉन्फिडेंस मिला 

वहीं, एक महिला उद्यमी नीता ने इस अनोखी पहल का लाभ लेते हुए बताया कि रेलवे ने हम आर्टिजन के लिए यह जो नया कदम उठाया है. इससे हमारे उत्पादकों की जानकारी ऑल ओवर इंडिया को पता चलता है कि जोधपुर में क्या-क्या हस्त निर्मित उत्पाद बन रहे है. इससे मुझे आर्थिक संबल भी मिला है. और कॉन्फिडेंट भी बिल्ड-अप हुआ है. लोगों को मेरे हाथ से बने हुए उत्पादन पसंद की आ रहे हैं.

जोधपुर रेल मंडल प्रबंधक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय और लघु उत्पादकों को स्वदेशी व स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने, बेचने और उच्च दृश्यता देने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कियोस्क आवंटित किए जा रहे हैं.

मंडल प्रबंधक ने बताया 15 रेलवे स्टेशनों पर है सुविधा 

उन्होंने बताया कि जोधपुर मंडल के करीब 15 रेलवे स्टेशनों पर स्थापित की गई ओएसओपी (OSOP) आउटलेट्स से स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर एक बड़ा बाजार मिल रहा है, जिससे वह आय के अतिरिक्त स्रोत से लाभांवित हो रहे हैं.

लघु उद्यमियों को मिला एक अच्छा प्लेटफॉर्म

सीनियर डीसीएम विकास खेड़ा ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल पर 15 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर 16 ओएसओपी आउटलेट्स स्थापित किए गए हैं. इससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर वहां के स्थानीय उत्पाद उपलब्ध हो जाते हैं और लघु उद्यमियों को अपने सामान की बिक्री का एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिल रहा है.

77 लाख रुपए के स्थानीय उत्पादों की हुई बिक्री

खेड़ा ने बताया कि कियोस्क आवेदकों को नाम मात्र के पंजीयन शुल्क पर निर्धारित अवधि के लिए आवंटित किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जोधपुर मंडल के 15  रेलवे स्टेशनों पर स्थापित कियोस्क पर विभिन्न आशार्थियों द्वारा अब तक करीब 77 लाख रुपए का उल्लेखनीय स्थानीय उत्पाद का सामान बेचा गया है. जिससे उन्हें आर्थिक संबल और राहत मिली है.

जोधपुर मंडल के इन स्टेशनों पर है सुविधा 

सीनियर डीसीएम के मुताबिक जोधपुर में 2 ओएसओपी आउटलेट्स स्थापित किए गए हैं, जबकि बाकी जैसलमेर, नागौर, सुजानगढ़, जालोर, बाड़मेर, मेड़ता रोड, पाली मारवाड़, नोखा, मकराना, डीडवाना, रामदेवरा, फलोदी, भगत की कोठी और लाडनूं में शुरू की गई है.

कियॉस्क पर उत्पादों की बिक्री में दिख रहा उत्साह

'एक स्टेशन एक उत्पाद योजना' के तहत स्थापित कियोस्क का आवेदकों को बारी-बारी आवंटित किया जा रहा है. जहां से जूट क्राफ्ट, चमड़ा उत्पाद, गुलाब हलवा, जूती, हैंडीक्राफ्ट, फ़ूड प्रॉडक्ट, मूंग बड़ी, पापड़, भुजिया, सूखी सब्जियां, मार्बल और पीला पत्थर और सजावटी सामान की बिक्री हो रही है.

जोधपुर व पाली स्टेशनों पर हुई सर्वाधिक बिक्री

ओएसओपी आउटलेट्स के शुरु होने के बाद से अब तक स्थानीय उत्पादों की सर्वाधिक बिक्री पाली रेलवे स्टेशन पर हुई है, जहां करीब 33 लाख रुपए का सामान की बिक्री हुई है. इसी प्रकार जोधपुर स्टेशन पर 15 लाख 22 हजार, मकराना पर 4 लाख 12 हजार, जालोर पर 4 लाख, नागौर पर करीब ढाई लाख और जैसलमेर स्टेशन पर 2 लाख 33 हजार रुपए के स्थानीय उत्पादों की बिक्री हुई.

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