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राजस्थान के किसानों की बल्ले-बल्ले! आज से शुरू हो रहे 'ग्राम उत्थान शिविर', एक ही छत के नीचे होंगे ये काम

Gram Utthan Shivir Rajasthan 2026: राजस्थान के किसानों और पशुपालकों के लिए आज का दिन महज एक साधारण दिन नहीं है, बल्कि एक ऐसी शुरुआत है जिसका इंतजार प्रदेश के लाखों ग्रामीण कर रहे थे.

राजस्थान के किसानों की बल्ले-बल्ले! आज से शुरू हो रहे 'ग्राम उत्थान शिविर', एक ही छत के नीचे होंगे ये काम
(सांकेतिक तस्वीर)

Rajasthan News: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने किसानों और पशुपालकों के दिन पलटने की तैयारी कर ली है. अगर आप खेती या पशुपालन से जुड़े हैं, तो शुक्रवार (23 जनवरी 2026) का दिन आपके लिए बेहद खास है. राज्य भर में आज से 'ग्राम उत्थान शिविरों' का शंखनाद हो रहा है. इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं की पहुंच सीधे गांव और खेत तक सुनिश्चित करना है.

कब और कहां जाना है?

ये शिविर दो चरणों में आपके नजदीकी गिरदावर सर्किल पर लगेंगे ताकि कोई भी लाभार्थी पीछे न छूटे. शिविरों का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा.

पहला चरण: 23, 24, 25, 31 जनवरी और 1 फरवरी.
दूसरा चरण: 5 से 9 फरवरी तक.

आपको क्या मिलेगा?

ग्राम उत्थान शिविरों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. यहां कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारी मौके पर ही मौजूद रहेंगे. सरकार का लक्ष्य बिचौलियों को खत्म कर सीधा लाभ लाभार्थियों के बैंक खातों और खेतों तक पहुंचाना है. यहां न केवल जानकारी दी जाएगी, बल्कि योजनाओं में रजिस्ट्रेशन भी तुरंत किया जाएगा.

मौके पर ही ये काम होंगे

शिविर में मौके पर ही खेती की नई तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और सोलर पंप की पूरी जानकारी और डेमो उपलब्ध कराया जाएगा. इतना ही नहीं, पशुपालकों के लिए पशु बीमा, फ्री टीकाकरण और डेयरी योजनाओं से जुड़ा लाभ भी एक ही छत के नीचे मिलेगा. खेती को वैज्ञानिक आधार देने के लिए शिविर में मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) और उन्नत बीजों का वितरण भी किया जाएगा, ताकि किसान अपनी फसल की गुणवत्ता सुधार सकें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन किसानों के फॉर्म किसी वजह से अटके हुए थे, उन पेंडिंग फॉर्म्स का पंजीकरण भी मौके पर ही पूरा कर उन्हें योजनाओं से तुरंत जोड़ा जाएगा.

किसानों से मांगे जाएंगे सुझाव

सरकार इन शिविरों के माध्यम से 'एग्रीटेक मीट' के लिए किसानों को जोड़ रही है. इन शिविरों के जरिए किसानों के सुझाव भी लिए जाएंगे ताकि भविष्य की नीतियां उनकी जरूरतों के हिसाब से बनें. मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तकनीक और पारदर्शिता का मिलन होगा, तभी राजस्थान का किसान आत्मनिर्भर बनेगा. यह अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और कृषि को घाटे से उबारकर लाभ का व्यवसाय बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

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