राजस्थान में शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव फिर तेज हो गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने तबादलों में भ्रष्टाचार और राजनीतिक द्वेष के आरोप लगाए हैं. जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए तबादलों में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. दोनों नेताओं के बीच शिक्षा विभाग को लेकर पहले भी कई मुद्दों पर टकराव होता रहा है. लेकिन इस बार सवाल तबादलों का है और आरोप सीधे भ्रष्टाचार से जुड़े हैं.
डोटासरा ने मंत्रियों के पीए-पीएसओ के दखल की कही बात
डोटासरा ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में तबादले पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहे. उनका दावा है कि प्रिंसिपल, लेक्चरर और सेकंड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों में भ्रष्टाचार अहम मुद्दा है. शिक्षा मंत्री के आसपास रहने वाले लोगों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रियों के पीए और पीएसओ तक तबादलों के मामले में कथित तौर पर दखल दे रहे हैं. डोटासरा ने सरकार को चुनौती दी कि मंत्रियों के पीए और पीएसओ के फोन की जांच करा ली जाए. इससे तबादलों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है.
"कांग्रेस सरकार के वक्त तबादलों का रेट कार्ड चलता था"
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ लगाया गया एक भी आरोप साबित हो जाए तो वह राजनीति छोड़ देंगे. दिलावर ने अपने स्टाफ को लेकर भी कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने पैसे लिए हैं और इसका प्रमाण सामने आता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए तबादलों और पोस्टिंग पर सवाल उठाए. कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय शिक्षकों के तबादलों के लिए कथित तौर पर रेट कार्ड चलता था.
शिक्षक भर्ती-पेपर लीक पर भी हो चुकी है बयानबाजी
तबादलों से पहले भी दोनों के बीच कई मुद्दों पर सियासी बयानबाजी हो चुकी है. इंग्लिश मीडियम स्कूल, शिक्षक भर्ती और पेपर लीक पर भी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिला. चाहे मुद्दा कोई भी रहा हो, लेकिन हर बार आरोपों के केंद्र में शिक्षा व्यवस्था रही है.
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