राजस्थान शिक्षा विभाग ने बच्चों के नाम बदलने के लिए शुरू किया गया 'सार्थक नाम' अभियान फिलहाल रोक दिया है. विभाग ने इसे स्थगित कर दिया है. दरअसल, कहा यह भी जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से नामों की एक सूची तैयार कर जारी की गई थी. मकसद था स्कूलों में पढ़ रहे उन बच्चों के नामों को बदलना जिन्हें 'अर्थहीन' माना गया था.
सूची जारी होते विवादों में घिरी
सूची जारी होते ही विवादों में घिर गई. लिस्ट में शामिल कई नाम खुद ही आपत्तिजनक और अटपटे निकले. 'भयंकर', 'भिखा', 'मक्खी', 'दहीभाई', 'अंधकार', 'बेचारादास' जैसे नामों पर अभिभावक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई. कई नामों में लड़के लड़कियों के जेंडर की गलतियां भी सामने आई हैं. विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया, और अभियान को रोकने का फैसला लिया है.
क्या था 'सार्थक नाम' अभियान?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस अभियान की घोषणा की थी. तर्क दिया गया था कि कुछ बच्चों के नाम ऐसे हैं, जिनसे उनमें हीन भावना आती है, इसलिए AI की मदद से नामों की नई सूची बनाकर स्कूलों को भेजी गई थी.
अब क्या होगा?
शिक्षा विभाग के ACS राजेश यादव के मुताबिक विभाग ने आदेश को स्थगित कर दिया है. अब बच्चों का नाम बदलना है या नहीं, यह फैसला पूरी तरह माता-पिता और अभिभावक अपने स्तर पर लेंगे. विभाग की तरफ से कोई दबाव नहीं रहेगा. शिक्षा मंत्री के दफ्तर से बात करने पर कहा गया कि फिलहाल नाम बदलने का सार्थक अभियान स्थगित किया गया है.
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