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Rajasthan: सीकर का जवान उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों में हुआ शहीद, 4 साल पहले बड़े भाई की हुई थी शहादत 

रतनलाल गुर्जर सीकर ज़िले के श्री माधोपुर के रहने वाले थे. उनकी ड्यूटी उत्तराखंड के जाजरदेवल पिथौरागढ़ में थी. ख़बर के मुताबिक़ बर्फीली पहड़ियों में ऑक्सीजन की वजह से उनकी जान चली गई.

Rajasthan: सीकर का जवान उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों में हुआ शहीद, 4 साल पहले बड़े भाई की हुई थी शहादत 
रतनलाल गुर्जर आईटीबीपी 14वीं बटालियन में तैनात थे

Shrimadhopur News: सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र का लाडला वीर सपूत रतनलाल गुर्जर उत्तराखंड के जाजरदेवल, पिथौरागढ़ में मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गया. जवान रतन लाल गुर्जर 14वीं बटालियन, आईटीबीपी में तैनात थे और बर्फीली पहाड़ियों में पेट्रोलिंग के दौरान ऑक्सीजन स्तर कम होने से वीरगति को प्राप्त हुए. जानकारी के अनुसार शहीद की पार्थिव देह आज देर रात अजीतगढ़ पुलिस थाना पहुंचेगी. जहां से कल शुक्रवार को राजकीय सैनिक सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव ढाणी लोहिया (चूडला तन सांवलपुरा तंवरान) में अंतिम संस्कार किया जाएगा.

बड़े भाई रामपाल गुर्जर भी भारतीय सेना में तैनात थे

शहीद रतनलाल गुर्जर चार भाइयों में सबसे छोटे थे. बड़े भाई रामपाल गुर्जर भी भारतीय सेना में तैनात थे और तीन साल 11 महीने पहले जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे. उनके दो अन्य भाई मोहन गुर्जर और रोशन गुर्जर अपने पिता बीरबल गुर्जर के साथ खेती का कार्य करते हैं. शहीद रतनलाल का विवाह बलेश देवी (कोटपूतली) से हुआ था. उनके तीन बच्चे हैं. सबसे बड़ी बेटी तनु (8 वर्ष), बेटा शुकाराम (5 वर्ष), और छोटी बेटी काजू (2 वर्ष) हैं. उनकी माँ आंची देवी गृहणी हैं.

खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा छा गया

गौरतलब है कि करीब एक माह पहले ही रतनलाल अपनी छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटे थे. उन्होंने आज सुबह 7 बजे परिजनों से बात कर मिशन पर जाने की सूचना दी थी और कहा था कि 3 मई 2025 को अपने बड़े शहीद भाई रामपाल गुर्जर की पुण्यतिथि पर छुट्टी लेकर घर आएंगे. परिजनों को क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद वह तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे. शहीद होने की खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा छा गया. पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.

गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा

कमांडो कैलाश गुर्जर को बटालियन के सीओ ने फोन पर शहादत की जानकारी दी. अब पूरे गांव की निगाहें लाडले की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के लिए लगी हुई हैं. गुरुवार को अजीतगढ़ पुलिस थाने से तिरंगा वाहन रैली के साथ पार्थिव देह को पैतृक गांव ले जाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा. जिसमें कई जनप्रतिनिधियों सहित प्रशासनिक अधिकारी शामिल होगें.

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