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राजस्थान के 2 सितारे कौन? जिन्हें 2026 में मिलेगा पद्मश्री सम्मान; लोक कला को दुनिया में दिलाई पहचान

Padma Shri Award Rajasthan: गणतंत्र दिवस के अवसर पर भरतपुर जिले के डीग निवासी गफरुद्दीन मेवाती जोगी और जैसलमेर के अलगोजा वादक तगा राम भील को कला के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा जायेगा.

राजस्थान के 2 सितारे कौन? जिन्हें 2026 में मिलेगा पद्मश्री सम्मान; लोक कला को दुनिया में दिलाई पहचान
अलगोजा वादक तगा राम भील और गफरुद्दीन मेवाती जोगी को मिलेगा पद्मश्री

Padma Shri Award Rajasthan: राजस्थान की लोक कला परंपरा के लिए यह गौरव का साल है. इस साल राजस्थान के दो ऐसे कलाकारों को पद्म श्री सम्मान से नवाजा जा रहा है, जिन्होंने जीवन भर अपनी साधना से विलुप्त होती लोक विधाओं को जीवित रखा और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई. भरतपुर जिले के डीग निवासी गफरुद्दीन मेवाती जोगी को कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान दिया जाएगा. मेवाती लोक संगीत, विशेष रूप से ‘पांडुन का कड़ा' और भपंग वादन की परंपरा को सहेजने में उनका योगदान अद्वितीय माना जाता है.

गफरुद्दीन मेवाती जोगी पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से इस पारंपरिक लोक विधा की साधना कर रहे हैं और इसे देश ही नहीं बल्कि दुनिया के मंचों तक पहुंचा चुके हैं.

गफरुद्दीन मेवाती जोगी ‘पांडुन का कड़ा' के ऐसे एकमात्र कलाकार माने जाते हैं, जो ढाणी शैली में महाभारत पर आधारित करीब 2500 दोहों का गायन करते हैं.

भपंग के साथ-साथ वे अलगोजा, चिकारा और जोगी सारंगी सहित लगभग 12 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों में पारंगत हैं. उनकी प्रस्तुतियों में मेवाती लोक जीवन, इतिहास और लोक आस्था की गहरी झलक देखने को मिलती है.

कई देशों में दे चुके हैं प्रस्तुति 

उन्होंने लंदन, पेरिस, कनाडा और फ्रांस सहित कई देशों में अपनी लोक कला की प्रस्तुति देकर भारतीय लोक संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है. वे इंग्लैंड की महारानी के समक्ष भी अपनी कला प्रस्तुत कर चुके हैं. पद्म श्री से पहले उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

जैसलमेर के तगा राम भील को भी सम्मान 

वहीं जैसलमेर क्षेत्र के मूल सागर के पास रहने वाले तगाराम भील को भी लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाजा जा रहा है. भील समुदाय से आने वाले तगा राम भील राजस्थान के प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं और आदिवासी लोक संगीत परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि माने जाते हैं. उन्होंने बचपन से ही अलगोजा वादन सीखकर लोक संगीत को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया और करीब तीन दशकों से अधिक समय से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

टागा राम देश विदेशों में दे चुके हैं प्रस्तुति 

तगा राम भील अलगोजा के साथ-साथ मटका और बाँसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों में भी निपुण हैं. उन्होंने राजस्थान डेजर्ट फेस्टिवल सहित कई प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दी है. ऑल इंडिया रेडियो और नेहरू युवा केन्द्र जैसे मंचों पर भी उनकी कला को स्थान मिला है. वे स्वयं अलगोजा वाद्य का निर्माण करते हैं और देश-विदेश से लोग उनके बनाए वाद्यों के लिए संपर्क करते हैं.

भील समुदाय से आने वाले तगा राम भील राजस्थान के प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं और आदिवासी लोक संगीत परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि माने जाते हैं.

तगा राम भील ने फ्रांस, अमेरिका, जापान, रूस और कई यूरोपीय देशों में अपनी प्रस्तुतियों और कार्यशालाओं के जरिए राजस्थान की आदिवासी लोक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया है. सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी साधना से लोक संगीत को नई पहचान दी है.

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