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This Article is From Jan 25, 2026

कौन हैं गफरुद्दीन मेवाती जोगी, जिन्हें अनोखे वाद्ययंत्र भपंग बजाने के लिए मिलेगा पद्मश्री

68 साल के गफरुद्दीन को सुबह फोन पर यह पद्मश्री अवार्ड मिलने की जानकारी मिली. गफरुद्दीन ने अपने पिता स्वर्गीय बुध सिंह जोगी के साथ 3 साल की उम्र में भपंग बजाना शुरू किया था.

कौन हैं गफरुद्दीन मेवाती जोगी, जिन्हें अनोखे वाद्ययंत्र भपंग बजाने के लिए मिलेगा पद्मश्री
अलवर के गफरुद्दीन मेवाती जोगी को भपंग बजाने के लिए मिलेगा पद्मश्री
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राजस्थान से तीन लोगों को पद्मश्री सम्मान मिलेगी. प्रदेश से गफरुद्दीन मेवाती जोगी और तगाराम भील को कला क्षेत्र में पद्मश्री मिलेगा, जबकि स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाज सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा. अलवर के भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी और जैसलमेर के तगाराम भील को अलगोजा के जरिए लोक कला को दुनियाभर में पहचान दिलाने के लिए पद्मश्री सम्मानित किया जाएगा. आईए जानते हैं कि पद्मश्री पाने वाले गफरुद्दीन मेवाती जोगी कौन हैं? उनका लोक कला के क्षेत्र में किस तरह का योगदान है. 

पुश्तैनी बजा रहे भपंग

भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी 60 से ज्यादा देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं. भगवान शिव के डमरू से तैयार किए गए वाद्य यंत्र भपंग को ये पुश्तैनी तरह से बजाते आ रहे हैं. इनका बेटा शाहरुख मेवाती जोगी आठवीं पीढ़ी का है. जो भपंग बजा रहा है. पद्मश्री की जानकारी मिलते ही परिवार में खुशी व जश्न का माहौल है. 

गफरुद्दीन मेवाती जोगी पहले डीग जिले के कैथवाड़ा गांव में रहते थे. हालांकि, अब वह अलवर में मुंगस्का के टाइगर कॉलोनी में रहने लगे हैं. गफरुद्दीन के छोटे भाई अभी कैथवाड़ा में रह रहे हैं.
गफरुद्दीन मेवाती जोगी के छोटे भाई भपंग बजाते हुए

गफरुद्दीन मेवाती जोगी के छोटे भाई भपंग बजाते हुए

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68 साल के गफरुद्दीन को सुबह फोन पर यह पद्मश्री अवार्ड मिलने की जानकारी मिली. गफरुद्दीन ने अपने पिता स्वर्गीय बुध सिंह जोगी के साथ 3 साल की उम्र में भपंग बजाना शुरू किया था. गफरुद्दीन के बेटे शहरुख खान मेवाती जोगी व उनके छोटे बच्चे भी भपंग बजाते हैं. महाभारत को मेवात एरिया में पांडव कड़े के रूप में गाया व बजाया जाता है.

विदेश के मंच पर दी प्रस्तुति

पांडव अज्ञातवास के दौरान जब अलवर के विराटनगर क्षेत्र में पहुंचे थे तो उस पूरे प्रसंग को भी महाभारत में शामिल किया गया है और उसका भी पांडव कड़े के रूप में गाया जाता है. साथ ही बृज व मेवाती शैली के लोक दोहे व लोक गीत देश विदेश के मंच पर प्रस्तुत किए हैं, 2800 गीत और दोगे बापन के साथ गए और बचाए गए हैं. लोक संगीत, गानों व गीतों को बॉलीवुड में भी कॉपी किया गया है और बॉलीवुड में भी इनको सुना जाता है. 

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राज्य सरकार से मिल चुका है सम्मान

गफरुद्दीन को राजस्थान सरकार, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से अवार्ड मिल चुका है. इसके अलावा अगर विदेश की बात करें तो इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया कनाडा पेरिस दुबई सहित 60 से ज्यादा देशों में यह लोग अपने भपंग वादन की प्रस्तुति पेश कर चुके हैं. साथ ही इंग्लैंड में एलिजाबेथ सहित कई ऐसे बड़े कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति पेश कर चुके है. कोरोना हो या स्वच्छता सभी पर इन्होंने अपने भपंग के माध्यम से लोगों को लोकगीत गाकर संदेश दिया. इनके लोकगीत व भपंग वादन के लोग दीवाने हैं व दूर-दूर से इनको सुनने के लिए लोग आते हैं.

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