Sawai Madhopur News: विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. बाघों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए रणथंभौर में प्रदेश का पहला टाइगर रिजर्व वेटेनरी हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया है. अब तक यहां के वन्यजीव केवल एक डॉक्टर के भरोसे थे, लेकिन अब उन्हें विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके अपने घर (जंगल) में ही मिल सकेंगी.
बरेली का चक्कर खत्म
इस अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाली अत्याधुनिक लैब है. पहले वन्यजीवों की मौत या बीमारी की जांच के लिए सैम्पल बरेली (उत्तर प्रदेश) भेजे जाते थे, जिसकी रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते थे. अब रणथंभौर में ही फोरेंसिक जांच हो सकेगी और रिपोर्ट महज 24 घंटे में मिल जाएगी. इससे 'इमर्जिंग डिजिट' जैसी बीमारियों (जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं) का पता लगाना आसान होगा.
4.5 करोड़ का बजट

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रणथंभौर के डीएफओ (DFO) मानस सिंह ने बताया कि बजट में घोषित साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि से इस प्रोजेक्ट को पंख लगे हैं. जोन नंबर 6 की राजबाग चौकी के पास 30 लाख रुपये की लागत से अस्पताल का शानदार भवन तैयार किया जा चुका है. अगले चरण में इसे डिजिटल एक्स-रे मशीन और अन्य वर्ल्ड क्लास मेडिकल उपकरणों से लैस किया जाएगा.
बिना बेहोश किए होगा टाइगर का इलाज
अस्पताल में 1000 वर्गगज के क्षेत्र में दो विशेष एनक्लोजर (बाड़े) बनाए गए हैं. अब तक घायल बाघों को बार-बार ट्रंकुलाइज (बेहोश) करना पड़ता था, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता था. अब बिना बेहोश किए बाघों को ऑब्जर्वेशन में रखा जा सकेगा और उनका इलाज किया जाएगा. अस्पताल में पोस्टमार्टम रूम, ट्रीटमेंट यूनिट और छोटे वन्यजीवों के लिए विशेष पिंजरे भी बनाए गए हैं.
आपसी संघर्ष में घायल बाघों को मिलेगी नई जिंदगी
रणथंभौर में अक्सर बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर आपसी संघर्ष होता रहता है. ऐसे में कई बार बाघ गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं. यह नया अस्पताल ऐसे समय में संजीवनी साबित होगा. यहां न केवल बाघों बल्कि लेपर्ड, भालू और अन्य छोटे वन्यजीवों का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा.
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