Rajasthan News: भरतपुर के पीलूपुरा में पिछले 3 दिनों से जारी आमरण अनशन सोमवार रात गंभीर मोड़ पर पहुंच गया. रीट (REET) परीक्षा में 372 पदों की मांग को लेकर धरने पर बैठे तीन युवाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने देर रात ही तीनों आंदोलनकारियों को जबरन उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.
इन युवाओं को कराया गया अस्पताल में भर्ती
आमरण अनशन पर बैठे अरुण गुर्जर, रणवीर गुर्जर और राजवीर की शारीरिक स्थिति पिछले 72 घंटों से अन्न-जल त्यागने के कारण काफी नाजुक हो गई थी. जिला प्रशासन ने उनकी जान को जोखिम में न डालते हुए उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के तहत अस्पताल शिफ्ट किया. सूचना मिलते ही तहसीलदार ने खुद जिला अस्पताल पहुंचकर तीनों युवाओं की सेहत का जायजा लिया और डॉक्टरों को उचित देखभाल के निर्देश दिए.
सहमति के बाद दोबारा क्यों शुरू हुआ अनशन?
यह पूरा विवाद तब फिर से गहराया जब सरकार और युवाओं के बीच बातचीत का रास्ता बंद हो गया. दरअसल, इन युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर 31 मार्च को भी धरना दिया था, जिसे प्रशासन ने सरकार से वार्ता कराने के आश्वासन पर स्थगित करवा दिया था. लेकिन जब 1 मई को निर्धारित वार्ता नहीं हुई, तो युवाओं ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया और दोबारा अनशन पर बैठने का फैसला किया.
क्या है 372 पदों का पूरा मामला?
युवाओं की मुख्य मांग रीट भर्ती में 372 अतिरिक्त पदों को शामिल करने की है. उनका आरोप है कि सरकार बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है. युवाओं का कहना है कि जब तक पदों की संख्या को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा. फिलहाल प्रशासन के लिए इन युवाओं की सेहत और कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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