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This Article is From Feb 23, 2026

JJM Scam में रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के वकील ने साथ छोड़ा, पहले दायर की थी FIR रद्द कराने की याचिका

सुबोध अग्रवाल के वकील एडवोकेट दीपक चौहान इस केस से हट गए हैं यानी वकील ने केस से दूरियां बना ली है. जबकि इससे पहले एडवोकेट दीपक चौहान ने ही सुबोध अग्रवाल के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी.

JJM Scam में रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के वकील ने साथ छोड़ा, पहले दायर की थी FIR रद्द कराने की याचिका

JJM Scam Rajasthan: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले (JJM Scam) मामले में फंसे रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. अग्रवाल ने हाल ही में हाई कोर्ट में FIR रद्द कराने को लेकर याचिका दर्ज कराई थी. जिसमें कोर्ट को बताया गया था कि जिस वक्त JJM घोटाला हुआ था उस समय तत्कालीन ACS सुधांश पंत के कार्यकाल में 90 प्रतिशत काम हुए थे. जबकि अग्रवाल के कार्यकाल में 10 प्रतिशत मूल्य के कामों हुए थे. लेकिन इस याचिका के दायर करने के बाद ही अग्रवाल के वकील ने उनका साथ छोड़ दिया है.

सुबोध अग्रवाल के वकील एडवोकेट दीपक चौहान इस केस से हट गए हैं यानी वकील ने केस से दूरियां बना ली है. जबकि इससे पहले एडवोकेट दीपक चौहान ने ही सुबोध अग्रवाल के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी. लेकिन याचिका दायर के दो दिन बाद ही वकील दीपक चौहान ने केस से दूरी बना ली है. याचिका में मुख्य रूप से बताया गया था कि अग्रवाल के कार्यकाल में 10 प्रतिशत मूल्य के काम हुए थे. जबकि 90 प्रतिशत काम तत्कालीन ACS सुधांश पंत के कार्यकाल में हुए थे.

ACB कर रही है अग्रवाल की तलाश

जेजेएम मामले में अहम किरदार रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को ACB ढूंढ रही है. माना जा रहा है कि सुबोध अग्रवाल के पास से अहम जानकारियां ACB को मिल सकती है और इस मामले में कई और नामों का खुलासा हो सकता है. लेकिन दूसरी ओर सुबोध अग्रवाल ने कोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द कराने की मांग की, इसके लिए कोर्ट को याचिका में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े 95 प्रतिशत वर्क ऑर्डर सुधांश पंत के कार्यकाल में जारी हुए थे.

उनका पीएचईडी में कार्यकाल 18 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ था. इससे पहले गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन के फर्जी प्रमाणपत्रों से टेंडर हासिल कर लिए थे. हाईकोर्ट अगले सप्ताह इस पर सुनवाई कर सकता है. वहीं, 95% वर्क ऑर्डर तत्कालीन एसीएस सुधांश पंत की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने स्वीकृत किए थे. अग्रवाल के कार्यकाल में केवल 10% से कम मूल्य के टेंडर मंजूर हुए. एसीबी ने सुधांश पंत के कार्यकाल की जांच नहीं की.

वकील दीपक चौहान ने दिया था बयान

एडवोकेट दीपक चौहान ने याचिका दायर करने के बाद बताया था कि याचिकाकर्ता सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने इन टेंडरों पर कोई भुगतान नहीं किया, इसलिए सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ. इरकॉन के ईमेल मिलते ही उन्होंने हाई लेवल कमेटी गठित की. कमेटी की रिपोर्ट पर दोनों फर्मों के टेंडर निरस्त कर ब्लैकलिस्ट किया गया.

अब वही दीपक चौहान इस केस से दूरी बना ली है. इस मामले के बाद फिर से नए सवाल उठने लगे हैं कि आखिर दीपक चौहान ने इस केस से दूरी क्यों बनाई. क्या यह उनका निजी फैसला है या फिर वह किसी के दबाव में केस से दूरी बनाने को मजबूर हुए हैं.

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