
Rajasthan News: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक टीम ने सोमवार को राजस्थान उच्च न्यायालय परिसर में स्थित कैंटीन का निरीक्षण किया और पाया कि सभी कैंटीन बिना 'फूड लाइसेंस' के चल रही थीं. यही नहीं अधिकारियों को इन कैंटीन में सड़े आलू प्याज, कृत्रिम रंग, सड़े हुए खाद्य पदार्थ, गंदे पात्र, गंदे स्टोव, पुरानी नमकीन, एक्सपायरी चॉकलेट सिरप, गोभी व गंदे पात्रों में बनती चाय मिली.
बिना फूड लाइसेंस के चल रहीं कैंटीन
अधिकारियों ने उच्च न्यायालय परिसर में सभी दुकानदारों और संचालकों के लाइसेंस बनने तक सभी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी. आधिकारिक बयान के अनुसार सोमवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के दल द्वारा उच्च न्यायालय परिसर में स्थित कैंटीन का निरीक्षण किया गया. सभी कैंटीन बिना ‘फूड लाइसेंस' के संचालित पाई गईं. यह कार्रवाई राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष भुवनेश शर्मा के लिखित आग्रह पर की गई थी.
मसाले के पैकेट एक्सपायरी डेट के पाए गए
अतिरिक्त आयुक्त पंकज ओझा ने बताया कि जांच में एक कैंटीन के फ्रिज में फंगस लगी हुई पाई गई तथा मसाले के पैकेट 'एक्सपायरी डेट' के पाए गए. इसके अतिरिक्त जंग लगे हुए डिब्बे भी पाए गए, जिनमें मसाला व अन्य सामग्री रखी हुई थी. सफाई और स्वच्छता की स्थिति ठीक नहीं पाई गई.
उन्होंने बताया कि खाने में इस्तेमाल रंग के डिब्बे पाए गए जो खाद्य सामग्री में डाले जाते थे. इस दौरान मेसर्स गिरधर गोपाल एंटरप्राइजेज के साथ साथ दुकान नंबर 15, दुकान नंबर 12 तथा दुकान नंबर 9, सरस डेयरी बूथ नंबर 181 तथा दुकान नंबर 21, 19, 17 एवं 8 का निरीक्षण किया गया.
लाइसेंस बनने तक बंद की कैंटीन
इसके अनुसार उच्च न्यायालय परिसर में खाने-पीने की दुकानों के सभी दुकानदारों और संचालकों के लाइसेंस बनने तक सभी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई. मुख्य रूप से दो कैंटीन से जांच हेतु कढ़ाई का तेल, सांभर, लस्सी, चने की दाल, चटनी, बेसन और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने जांच हेतु लिए गए, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी.