Rajasthan News: दिल्ली की एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजस्थान में सड़क हादसे का शिकार हुई 35 वर्षीय इटालियन इंजीनियर क्रिस्टीना सेवेरी के माता-पिता को 4.59 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही हादसे में गंभीर रूप से घायल उनकी बहन मारिया क्लाउडिया को भी 1.82 करोड़ रुपये देने का फैसला सुनाया गया है.
क्या था मामला?
यह खौफनाक हादसा 10 अगस्त 2008 को हुआ था. इटली की दो बहनें, क्रिस्टीना और मारिया, जोधपुर से जयपुर जा रही थीं. राजस्थान के पाली जिले में नेशनल हाईवे-14 पर उनकी टूरिस्ट कार की भिड़ंत एक तेज रफ्तार ट्रक से हो गई. क्रिस्टीना ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया, जबकि मारिया को गंभीर चोटें आईं. मारिया का इलाज पहले राजस्थान के ब्यावर में हुआ और फिर वह इटली लौट गईं.
'दोनों ड्राइवरों की गलती थी'
पीठासीन अधिकारी चारू गुप्ता ने अपने फैसले में कहा कि यह दुर्घटना 'कंपोजिट नेग्लिजेंस' (दोनों पक्षों की लापरवाही) का नतीजा थी. कोर्ट ने पाया कि ट्रक गलत साइड से तेज रफ्तार में आ रहा था. वहीं, टूरिस्ट कार का ड्राइवर भी लापरवाही से और 'जिग-जैग' तरीके से गाड़ी चला रहा था. हैरानी की बात यह रही कि दोनों ड्राइवरों में से कोई भी गवाही देने के लिए कोर्ट नहीं आया, जिसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ प्रतिकूल धारणा बनाई.
बीमा कंपनियों की दलीलें खारिज
ट्रक की बीमा कंपनी (बजाज आलियांज) ने तर्क दिया कि ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं था, इसलिए वे जिम्मेदार नहीं हैं. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए खारिज कर दिया क्योंकि कंपनी ने इसका कोई सबूत पेश नहीं किया. वहीं, कार की बीमा कंपनी (यूनाइटेड इंडिया) ने केवल ट्रक ड्राइवर को दोषी ठहराने की कोशिश की, जिसे कोर्ट ने नहीं माना.
'विदेशी होने से नहीं बदलता बुजुर्ग माता-पिता का हक'
अदालत ने क्रिस्टीना के 60 वर्षीय पिता की पेंशन को उनकी निर्भरता (Dependency) खारिज करने का आधार नहीं माना. कोर्ट ने स्पष्ट कहा, 'बुजुर्ग माता-पिता की बच्चों पर निर्भरता का सिद्धांत सिर्फ इसलिए नहीं बदल सकता क्योंकि वे विदेशी नागरिक हैं या उन्हें पेंशन मिल रही है.'
सीधे इटली के बैंक खाते में जमा होगा पैसा
ट्रिब्यूनल ने मानवीय रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि मुआवजा राशि सीधे दावेदारों के इटली स्थित बैंक खातों में जमा की जाए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें पैसा लेने के लिए भारत आने पर मजबूर करना उनके लिए भारी परेशानी का सबब होगा.
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