
देश की आधी आबादी को सम्मान देने और उन्हें पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने के सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री ने आज से करीब 9 साल पहले देश में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान शुरू किया, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसको ऐसे अभियानों से कोई फर्क नहीं पड़ता है. यहां 21वीं सदी में भी बेटियों के घर पैदा होने पर मायूसी छा जाती है, बेटी के जन्म देने वाली मां पर जुल्म ढाए जाते हैं. ऐसा ही एक ताजा मामला अजमेर के अलवर गेट थाना क्षेत्र में रिपोर्ट हुआ है.
शादी के बाद मायका छोड़कर ससुराल अलवर पहुंची के इस मां के लिए उसकी अपनी संतानें इसलिए शापित हो गईं, क्योंकि वो बेटे नहीं, बेटियां हैं. मामला मदर शक्तिनगर गली नंबर 3 का है, जहां पीड़िता का पति मुकेश सिर्फ इसलिए पत्नी रोमा के साथ क्रूरता की सारी हदें पार करता है, क्योंकि उसकी कोख से बेटे के बजाय बेटियों ने जन्म लिया. बीते छह सालों में एक के बाद एक जन्मीं तीन बेटियों ने पति को इंसान से हैवान बनने में कोई कसर नहीं छोड़ी. बेटियों के लिए पत्नी रोमा को दोषी मानते हुए मुकेश के साथ जानवरों की तरह व्यवहार करने से भी नहीं कतराता है.

पति के जुल्मों के खिलाफ पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराया
कहते हैं कि हर जुल्म की मियांद होती है. कुछ ऐसा ही हुआ जब पति मुकेश ने एक दिन ताना देते हुए पीड़िता को घर से निकाल दिया. इस बार पीड़िता ने ठान लिया कि अब वह जुल्म और नहीं सहेगी. पति के जुल्मों के खिलाफ आवाज़ उठाने का प्रण लेकर वह स्थानीय अलवर गेट थाने पहुंच गई.
हालांकि थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसकी हिम्मत तोड़ने में पूरी कोशिश की. पुलिसकर्मियों ने पीड़िता के साथ बदतमीजी करने के बाद बिना कार्रवाई किए रवाना कर दिया. पीड़िता का प्रण इतना दृढ़ था और उसने पति मुकेश और अलवर गेट थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत लेकर एसपी थाने पहुंच गई.
बेटियों को जन्म के बाद ससुराल का रवैया बदल गया
पीड़िता रोमा' की शादी 6 साल पहले अजमेर के मदार शक्ति नगर गली नंबर 3 निवासी मुकेश के साथ की हुई थी। पीड़िता के अनुसार शादी के बाद कुछ समय तक सब ठीक-ठाक चला, लेकिन एक के बाद एक जब उसने तीन बेटियों को जन्म दिया, तो उसके खिलाफ पति समेत परिवार का रवैया बदल गया।
ससुराल वाले बेटा न पैदा होने का ताना मारने लगे
पीड़िता का आरोप है कि बेटियों के जन्म के बाद से ही उसके पति और ससुराल वालों का व्यवहार बदल गया। पीड़िता की मानें तो तीन बेटियों के पैदा होने के बाद से लगातार उसे घर में बेवजह प्रताड़ित किया जाने लगा। सास, ससुर और अन्य ससुराल वाले बेटा न पैदा होने का ताना मारने लगे.
आए दिन शराब के नशे में पति मारपीट करने लगा
पीड़िता ने कहा कि वहा बेटियों के ताने से टूट चुकी थी और मानसिक समस्या से जूझ रही थी तब पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करने लगा। पीड़िता ने कहा, बेटी पैदा क्या हुई, उसका पति ही उसका दुश्मन बन बैठा है। पीड़िता का आरोप है कि बीते दिनों उसके पति ने उसे न केवल बेरहमी से मारा पीटा बल्कि बेटा नहीं पैदा करने को लेकर अपमानित किया। पीड़िता ने बताया, कई बार जानवरों की तरह मारपीट की गई और तीन-तीन दिनों तक भूखा-प्यासा रखा जाता था।
पति ने धक्के देकर ससुराल से बाहर निकाला
आपबीती सुनाते हुए भावुक रोमा ने कहा कि उसने पति और ससुराल वालों की हैवानियत की लिखित शिकायत अलवर गेट थाने में दर्ज कराने पहुंचीं, लेकिन घर का मामला कहकर पुलिस ने कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया. पीड़िता मामले की शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और मामले की लिखित शिकायत दर्ज की गई। पति के जुल्मों के बावजूद एक बार ससुराल में वापस जाने का प्रयास किया, लेकिन पति ने ससुराल से बाहर निकाल दिया गया.
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रोमा
अपनी बेटियों के लिए न्याय चाहती है एक मां
पीड़िता का कहना है कि वह ससम्मान अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति उसे अब अपने साथ नहीं रखना चाह रहा। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से उक्त मामले में अब आरोपी पति और ससुराल वालों पर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही, ससुराल वालों से खतरे को देखते हुए एसपी कार्यालय से अपनी जानमाल की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है.