
सीकर के राधा किशनपुरा इलाके में बुधवार की शाम को एक निर्माणाधीन रेजीडेंसी में बने पानी के टैंक में गिरने से 5 साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई है. बच्ची के परिजन उसी निर्माणाधीन रेजीडेंसी में काम कर रहे थे. फिलहाल मासूम बच्ची के शव को एसके अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है. ठेकेदार पर परिजन और स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए आर्थिक मुआवजे की मांग को लेकर निर्माणाधीन रेजीडेंसी के बाहर धरने पर बैठे गए. सूचना पर उद्योग नगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और धरने पर बैठे लोगों से समझाइश की कोशिश कर रही है.
4 महीने से काम कर रहा था परिवार
मृतक बच्ची रोशनी के पिता मध्य प्रदेश निवासी मजदूर गोलू मौर्य ने बताया कि वह पिछले करीब 4 महीने से निर्माणाधीन रेजीडेंसी में मजदूरी का काम कर रहा है. आज बुधवार को दोपहर बाद बच्ची रोशनी खेलते समय पानी के टैंक में गिर गई. जिससे बच्ची रोशनी की मौत हो गई. निर्माणाधीन रेजीडेंसी के पास रहने वाली महिला सुमन कुमावत ने बताया कि मध्य प्रदेश के रहने वाले मजदूर बिल्डिंग में निर्माण कार्य का काम करते हैं.
आज दोपहर करीब 3:30 बजे बिल्डिंग में काम करने वाले मजदूर उनके पास आए और कहा कि उनकी 5 साल की बच्ची रोशनी उन्हें नहीं मिल रही है, जिस पर उन्होंने आसपास बच्ची की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली. इसके बाद पास में बने पानी के टैंक में गिरने का अंदेशा होने पर उसमें देखा तो टैंक में पानी भरा हुआ था.
बिल्डर पर लगाया लापरवाही का आरोप
एक बार तो उन्हें बच्ची दिखाई नहीं दी, लेकिन पानी के टैंक में झुक कर देखा तो बच्ची टैंक में गिरी हुई मिली. मासूम बच्ची रोशनी को तुरंत पानी के टैंक से निकलकर अस्पताल लिया गया, जहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया. स्थानीय महिला ने कहा कि पानी के टैंक पर ढक्कन सहित सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं, जो बिल्डर की बड़ी लापरवाही है.
इसके साथ ही बिल्डिंग में कई जगह बने हौद में भी सुरक्षा के प्रबंध नहीं किए गए हैं. निर्माणाधीन रेजीडेंसी के बाहर धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाए, इसके साथ ही निर्माणाधीन बिल्डिंग में खुले पड़े चैंबर और पानी के टैंक पर बिल्डर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करें ताकि ऐसा हादसा वापस नहीं हो.