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शेखावाटी के सबसे बड़े अस्पताल में इंटर्न करेंगे इलाज? विभाग ने बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को निकाला

शेखावाटी के सबसे बड़े श्री कल्याण अस्पताल में संविदाकर्मियों को हटाए जाने के बाद भारी हंगामा शुरू हो गया है. RajMES के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को नर्सिंग स्टाफ ने 'अन्याय' बताते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है. यह गतिरोध मरीजों की मुश्किलों को बढ़ा सकता है.

शेखावाटी के सबसे बड़े अस्पताल में इंटर्न करेंगे इलाज? विभाग ने बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को निकाला
सीकर के श्री कल्याण अस्पताल में हंगामा, संविदाकर्मियों को निकाला; अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
NDTV Reporter

Sikar News: शेखावाटी के सबसे बड़े मेडिकल सेंटर, श्री कल्याण अस्पताल (SK Hospital) में शुक्रवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया. इस फैसले के विरोध में आक्रोशित चिकित्सा कर्मियों ने अस्पताल परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. संविदाकर्मियों ने प्रशासन पर लालच और राजनीतिक दबाव के गंभीर आरोप लगाते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

क्यों हटाए गए संविदाकर्मी?

जानकारी के अनुसार, राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी (राजमेश) ने वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला देते हुए नर्सिंग संविदाकर्मियों को हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने उन्हें सेवाओं से मुक्त कर दिया. अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अब इन संविदाकर्मियों की जगह 55 इंटर्न स्टूडेंट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे नियमित स्टाफ का कार्यभार कम होगा और स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग मिल सकेगी.

'बिना सैलरी ढाई महीने से कर रहे थे काम'

धरने पर बैठी संविदाकर्मी मनीषा चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, 'हम पिछले 3 साल से अल्प वेतन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. हमें बिना किसी नोटिस के धक्के मारकर निकाला जा रहा है. हमारी जगह अनुभवहीन नर्सिंग स्टूडेंट्स से काम कराया जा रहा है, जो मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है.' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल भी बिना सैलरी के उन्होंने ढाई महीने काम किया था, लेकिन इस बार उनका टेंडर रिन्यू करने के बजाय उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के आरोप

NDTV से बातचीत में संविदा नर्सिंगकर्मी विजेंद्र ने प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अन्य मेडिकल कॉलेजों में संविदाकर्मी अभी भी काम कर रहे हैं, लेकिन सीकर में ही ऐसा भेदभाव क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधिकारी राजनीतिक दबाव और पैसों के लालच में आकर नए लोगों की भर्ती की फिराक में हैं. विजेंद्र ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें वापस काम पर नहीं रखा गया, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी.

प्रशासन का दावा- बेहतर होगी व्यवस्था

दूसरी ओर, चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि संविदाकर्मियों का 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह निर्णय लिया गया है. इंटर्न स्टूडेंट्स के आने से अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होगा. हालांकि, संविदाकर्मियों का तर्क है कि उनके 3 साल अभी पूरे नहीं हुए हैं और उनके पास हटाने का कोई लिखित आदेश तक नहीं पहुंचा है.

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