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This Article is From Jan 12, 2026

नागौर का वो 'चपरासी' जिसकी एक जिद ने 22 साल बाद MP में मां से मिलाया, राजस्थान की वोटर लिस्ट बनी क्लाइमेक्स

22 साल पहले राजस्थान के नागौर को अपना घर बनाने वाले विनोद ने कभी नहीं सोचा था कि जिस 'वोटर आईडी' के लिए वह भटक रहा है, वही उसे उसकी मां से मिला देगी.

नागौर का वो 'चपरासी' जिसकी एक जिद ने 22 साल बाद MP में मां से मिलाया, राजस्थान की वोटर लिस्ट बनी क्लाइमेक्स
SIR अभियान बना वरदान: राजस्थान की वोटर लिस्ट ने 22 साल बाद मां-बेटे को मिलाया
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के नागौर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी का काम करने वाले विनोद उर्फ विनोद गैरी को सब एक साधारण व्यक्ति समझते थे. किसी को नहीं पता था कि विनोद अपनी पत्नी पुष्पा और बच्चों के साथ यहां एक 'वनवास' काट रहे हैं. 22 साल पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर से भागकर आए इस जोड़े के लिए नागौर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि उनकी मोहब्बत की पनाहगाह था. परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने के बाद विनोद ने राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहीं बस गए.

SIR ने मां-बेटे से मिलाया

इस कहानी में टर्निंग पॉइंट तब आया जब राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू हुई. यहीं से राजस्थान का कनेक्शन शुरू होता है. विनोद अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाना चाहते थे. नियम के मुताबिक, उनसे उनके माता-पिता के EPIC (निर्वाचन फोटो पहचान पत्र) नंबर मांगे गए. अपनी जड़ों को पूरी तरह न भूलने वाले विनोद ने इसी जानकारी के लिए मंदसौर की अपनी पुरानी पंचायत से संपर्क किया. यही वो छोटी सी कोशिश थी जिसने नागौर और मंदसौर के बीच टूटे हुए 22 साल पुराने रिश्तों को फिर से जोड़ दिया.

मंदसौर पुलिस पहुंची नागौर

जैसे ही विनोद ने पंचायत से संपर्क किया, खबर उसकी बूढ़ी मां तक पहुंच गई. मंदसौर पुलिस की एक विशेष टीम गठित हुई और सुराग तलाशते हुए राजस्थान के नागौर पहुंची. पुलिस ने पाया कि जिस विनोद को घरवाले मृत या खोया हुआ मान चुके थे, वह नागौर में सम्मानजनक जीवन जी रहा है. विनोद का अब 21 साल का शादीशुदा बेटा और 16 साल की बेटी भी है.

कागजों ने मिलाया परिवार

यह मामला सिर्फ एक पुलिस केस की सफलता नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी दस्तावेज (Voter ID) एक खोए हुए परिवार को मिला सकते हैं. विनोद ने धनगर समुदाय की पुष्पा से प्रेम विवाह किया था, जिसका विरोध हुआ था. 22 साल तक नागौर में रहने के बावजूद विनोद के मन में अपनी मां से मिलने की कसक बाकी थी, जो अनजाने में ही सही, निर्वाचन विभाग की सख्ती के कारण पूरी हो गई.

राजस्थान से एमपी तक का सफर

मंदसौर की 'नयी आबादी' पुलिस जब विनोद और उसके बच्चों को नागौर से लेकर एमपी पहुंची, तो 22 साल का इंतजार आंसुओं में बह गया. एक मां को उसका बेटा मिल गया और राजस्थान के नागौर को वह शख्स मिल गया जिसकी पहचान अब सिर्फ एक 'चपरासी' की नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की है जो अपनी जड़ों से कभी अलग नहीं हुआ था.

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