Rajasthan News: राजस्थान के अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व के सीमांकन को लेकर चल रही प्रक्रिया को स्थानीय उद्योग संगठनों ने समर्थन दिया है. विभिन्न व्यापारिक संघों ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही यह प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए.
भ्रांतियों को किया खारिज
व्यवसाय यूनियन के जिला सचिव सुबोध गोयल ने कहा कि सीमांकन को लेकर गलत धारणाएं फैलाई जा रही थीं. उन्होंने साफ किया कि इस बदलाव का मकसद खनन गतिविधियों को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि केवल सरिस्का के कोर और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट क्षेत्र का सही निर्धारण करना है.
सीमांकन से बढ़ेगा सरिस्का का दायरा
उद्योग संगठनों का मानना है कि नए सीमांकन से सरिस्का क्षेत्र का विस्तार होगा. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी. लंबे समय से व्यापारी इस प्रक्रिया की मांग कर रहे थे.
2007 से चल रहा है मामला
बताया गया कि वर्ष 2007 में केंद्र सरकार ने पहली बार इस क्षेत्र का निर्धारण किया था. उस समय इसको लेकर व्यापारियों पर कोई विशेष पाबंदी नहीं थी. लेकिन बाद में नियमों में बदलाव के चलते कई तरह की बंदिशें लगाई गईं जिससे व्यापार प्रभावित हुआ.
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि सेंचुरी क्षेत्र से अधिक सीटीएच एरिया निर्धारित हो गया है इसलिए सीमांकन जरूरी है. अब कोर्ट सभी पक्षों को सुनकर अंतिम निर्णय लेगा.
निवेश और पर्यटन पर असर
व्यापारियों ने बताया कि सीमांकन स्पष्ट नहीं होने से कई निवेशकों की योजनाएं अटक गई हैं. जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण बड़ा निवेश फंस गया है जिससे अलवर के पर्यटन और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ा है. उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सीमांकन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़े और क्षेत्र में विकास को गति मिल सके.
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