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Udaipur: 'अगर FIR के बजाय घाव देखते तो वो जिंदा होते...' सविना थाने और MB अस्पताल के बीच कैसे हार गई एक जिंदगी?

उदयपुर में चाकूबाजी के शिकार प्रेम गमेती की मौत ने सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है. पत्नी का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के बजाय थाने भेज दिया और पुलिस रिपोर्ट मिलने तक पति की सांसें थम गईं.

Udaipur: 'अगर FIR के बजाय घाव देखते तो वो जिंदा होते...' सविना थाने और MB अस्पताल के बीच कैसे हार गई एक जिंदगी?
उदयपुर: चाकूबाजी के शिकार युवक की मौत पर बवाल, पत्नी का आरोप- 'इलाज के बजाय पुलिस रिपोर्ट मांगते रहे डॉक्टर'
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान की 'लेक सिटी' उदयपुर के हिरण मगरी थाना क्षेत्र में हुई चाकूबाजी की घटना ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है. हमले में घायल हुए युवक प्रेम गमेती की मौत के बाद आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है. शुक्रवार को दूसरे दिन भी मोर्चरी के बाहर धरना जारी रहा, जहां उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा ने पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया है.

‘अगर इलाज मिलता तो बच जाती जान'

मृतक प्रेम गमेती की पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. उन्होंने प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह अपने घायल पति को लेकर एमबी (MB) अस्पताल पहुंचीं, तो वहां डॉक्टरों ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय खानापूर्ति की. पत्नी का आरोप है कि डॉक्टरों ने मामूली पट्टी करके उन्हें पुलिस रिपोर्ट लिखवाने के लिए थाने भेज दिया. सविना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के चक्कर में आधा घंटा बर्बाद हो गया. जब तक वे वापस अस्पताल लौटते, प्रेम दम तोड़ चुका था.

Udaipur Protest

Photo Credit: NDTV Reporter

पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर पुलिस रिपोर्ट का दबाव न बनाकर तुरंत इलाज शुरू होता, तो प्रेम आज जिंदा होता.

परिजनों की प्रमुख मांगें क्या-क्या हैं?

धरने पर बैठे परिजनों और समाज के लोगों ने सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं.

  1. दोषी डॉक्टरों और देरी करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो.
  2. मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.
  3. परिवार के एक सदस्य को संविदा पर सरकारी नौकरी मिले.

'आरोपियों की तलाश में 10 टीमें दे रहीं दबिश'

मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी सूर्यवीर सिंह ने बताया कि चाकूबाजी करने वाले बदमाशों को नामजद कर लिया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10 विशेष टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. पुलिस ने जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे होने का दावा किया है.

'पीड़िता के आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन'

वहीं, एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने कहा कि परिजनों के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है. बयानों और साक्ष्यों के आधार पर यदि किसी कर्मचारी या डॉक्टर की लापरवाही पाई जाती है, तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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