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This Article is From Feb 06, 2026

Rajasthan: खेजड़ी के लिए अनशन तो टूटा पर धरना जारी, अब पूरे राजस्थान में 'ट्री एक्ट' लागू करने की उठी मांग

Rajasthan News: राजकीय वृक्ष 'खेजड़ी' को बचाने को लेकर पिछले पांच दिनों से बीकानेर में जारी अनशन कल देर रात खत्म हो गया. लेकिन धरना अभी भी जारी है. जिसे लेकर आंदोलनकारियों की कुछ मांगे जिन्हें उन्होंने राज्य सरकार के सामने रखी है.

Rajasthan: खेजड़ी के लिए अनशन तो टूटा पर धरना जारी, अब पूरे राजस्थान में 'ट्री एक्ट' लागू करने की उठी मांग
धरने पर बैठे लोग
NDTV

Rajasthan News:  राजस्थान के राजकीय वृक्ष 'खेजड़ी' को बचाने को लेकर पिछले पांच दिनों से बीकानेर में जारी महापड़ाव में कल एक बड़ी सफलता मिली. जिसके बाद 500 से ज्यादा लोगों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. हालांकि, आंदोलनकारी अभी भी धरना स्थल पर डटे हुए हैं. उनकी मांग अब केवल बीकानेर या जोधपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे प्रदेश के लिए कड़ा 'ट्री एक्ट' (वृक्ष कानून) लागू करवाने पर अड़े हैं.

 'ट्री एक्ट' पर पेंच बरकरार

बुधवार को आंदोलन के चौथे दिन राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में उद्योग राज्य मंत्री के के बिश्नोई महापड़ाव स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से वार्ता की. साथ ही उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ने अब से जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. साथ ही बताया कि सीएम ने इसी विधानसभा सत्र में 'ट्री एक्ट' लाने की बात कही है. इसके बाद आंदोलनकारियों में सबसे पहले संतों ने अनशन खोला फिर बाकी लोगों ने. लेकिन अभी वह धरने पर बैठे हुए है क्योंकि उनका कहना है कि भले ही सरकार ने दोनों संभागों जोधपुर और बीकानेर संभाग में तत्काल प्रभाव से खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है. लेकिन जब तक यह कानून पूरे राजस्थान में प्रभावी नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

सिर्फ बीकानेर ही क्यों? नागौर-पाली में भी तो कट रहे हैं पेड़

धरना स्थल पर मौजूद लोगों का तर्क है कि पर्यावरण की रक्षा टुकड़ों में नहीं की जा सकती. आंदोलनकारियों ने कहा कि हमारी ये मांग केवल खेजड़ी के पेड़ के लिए नही बल्कि पूरे राजस्थान के लिए है. कल भी नागौर और पाली में हरे पेड़ों की कटाई की गई. इसलिए हम चाहते है जब तक ट्री एक्ट कानून की शक्ल नहीं ले लेता, तब तक सरकार को एक अंतरिम आदेश जारी करे, जिसमें पूरे प्रदेश में कहीं भी एक भी हरा वृक्ष नहीं काटा जाए इसकी सूचना हो.

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें

खेजड़ी संरक्षण को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे राजस्थान के पर्यावरण को बचाने के लिए वह अपनी मांगों के साथ अभी भी धरने पर बैठे हुए है. आंदोलनकर्ताओं का कहना है कि केवल बीकानेर-जोधपुर ही नहीं, पूरे राजस्थान में हरे पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगे.  इसी सत्र में 'ट्री एक्ट' पारित हो, जिसमें पेड़ काटने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान हो.  कानून बनने तक सरकार एक प्रशासनिक आदेश निकाले जिससे प्रदेश के अन्य जिलों (जैसे नागौर, पाली) में चल रही कटाई रुक सके. लोगों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और संस्कृति का हिस्सा है. एक भी पेड़ का कटना पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ता है. 

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