
Vasundhara Raje: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे इन दिनों काफी सुर्खियों में है. वसुंधरा राजे लगातार अपने शायराना अंदाज में जहां विरोधियों पर तंज कस रही हैं. वहीं अपनी बात भी वह इसी अंदाज में रख रही है. बीते दिन वसुंधरा राजे जयपुर में ओम प्रकाश माथुर के अभिनंदन कार्यक्रम में शामिल हुई थी. उन्होंने इस कार्यक्रम में भी अपने अंदाज में संबोधित किया. वहीं उन्होंने सदस्यता अभियान शुरू होने पर जयपुर में सदस्यता ग्रहण नहीं की. जबकि उन्होंने झालावाड़ में आकर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. हालांकि राजे ने इसकी वजह भी बताई है.
वसुंधरा ने जयपुर में क्यों नहीं ली बीजेपी की सदस्यता
वसुंधरा राजे ने बुधवार (4 सितंबर) को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. वहीं सदस्यता ग्रहण करने के बाद कहा, 'घूम लिया मैंने जग सारा, अपना घर है सबसे प्यारा. उन्होंने कहा कि मुझे जयपुर में सदस्यता ग्रहण करने के लिए कहा गया था. लेकिन मैंने निर्णय लिया कि मैं अपने घर झालावाड़ में ही सदस्ता ग्रहण करूंगी.
धैर्य रखा जाए तो मंजिल जरूर मिलेती है
राजे ने कहा कि 21 अक्टूबर 1951 में हमारी विचारधारा का जो जनसंघ रूपी कारवां शुरू हुआ, वह आज विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुका है. यह हमारे कार्यकताओं की बदौलत हुआ. कार्यकर्ताओं के धैर्य की वजह से हुआ. यदि धैर्य रखा जाये तो मंज़िल ज़रूर मिलती है. हमारे कार्यकर्ताओं ने धैर्य रखा तो आज भाजपा इस मुक़ाम पर पहुंची. हमारे कार्यकर्ताओं के लिए पद नहीं, संगठन सर्वोपरि है. वे खुद के लिए नहीं संगठन के लिए जीते हैं.
कभी जनसंघ की सिर्फ 3 सीटें हुआ करती थीं
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब देश में जनसंघ की सिर्फ 3 सीटें हुआ करती थी. आज देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसी विचारधारा भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार है. एक जमाना था जब किसी गांव में सरपंच तक बीजेपी का नहीं मिलता था, आज देश के अधिकांश प्रदेशों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार है.
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