Rajasthan Panchayat Chunav: राजस्थान में भले ही पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ हो लेकिन राजस्थान के जनजाति उपयोजना क्षेत्र यानी टीएसपी में आरक्षण का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बनता जा रहा है. आदिवासी बेल्ट में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और आरक्षण का मसला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है. लंबे समय से संवैधानिक लाभ से वंचित OBC, MBC और EWS वर्ग अब संगठित होकर अपनी हिस्सेदारी की मांग बुलंद कर रहे हैं. इस मांग को नई धार तब मिली जब गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय सिंह बैंसला ने टीएसपी क्षेत्र के दौरे कर स्थानीय समाज के साथ संवाद शुरू किया. उनके इस दौरे ने न केवल आंदोलन को ऊर्जा दी है बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण भी गढ़ने शुरू कर दिए हैं.
OBC, MBC और EWS में क्यों है असंतोष
प्रदेश में ओबीसी को 21 प्रतिशत, एमबीसी को 5 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान है. लेकिन टीएसपी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था अलग ढांचे पर आधारित है. यहां 45 प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जनजाति और 5 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग के लिए निर्धारित है जबकि शेष 50 प्रतिशत सीटें अनारक्षित श्रेणी में आती हैं. यही व्यवस्था अब OBC, MBC और EWS वर्ग के असंतोष की वजह बन रही है.
दिलचस्प पहलू यह है कि टीएसपी क्षेत्र में कांग्रेस, भाजपा और बीएपी जैसे प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर टकराव से बचते नजर आ रहे हैं. सभी दलों के स्थानीय प्रतिनिधि यह संकेत दे रहे हैं कि यदि संवैधानिक दायरे में रहकर और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था से छेड़छाड़ किए बिना समाधान निकाला जाता है तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी. यह रुख बताता है कि टीएसपी बेल्ट में आरक्षण का मुद्दा आने वाले चुनावों में निर्णायक फैक्टर बन सकता है.
ओबीसी वर्ग ने अपनाई आरक्षण नहीं तो वोट नहीं की रणनीति
टीएसपी क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में उन्हें समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे सामाजिक असंतुलन के साथ राजनीतिक असंतोष भी बढ़ रहा है. सरदार पटेल सेना के संयोजक सुनील पाटीदार का कहना है कि संगठन गांव-गांव और ढाणी-ढाणी बैठकों के जरिए इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रहा है. इस बार ओबीसी वर्ग ने आरक्षण नहीं तो वोट नहीं की रणनीति अपनाने के संकेत भी दिए हैं, जो चुनावी राजनीति के लिए नई चुनौती बन सकता है.
क्या है आरक्षण का समीकरण
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय सिंह बैंसला के हालिया दौरे ने इस मुद्दे को राज्यस्तरीय राजनीतिक विमर्श में ला खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि संविधान के तहत आरक्षण का लाभ क्षेत्र या स्थान के आधार पर नहीं रोका जा सकता. उनका आरोप है कि वर्ष 2013 से टीएसपी क्षेत्र में ओबीसी, एमबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है. बैंसला ने सरकार से मांग की है कि टीएसपी क्षेत्र के अनारक्षित 50 प्रतिशत हिस्से में ओबीसी के 21 प्रतिशत का 10.50 प्रतिशत, एमबीसी के 5 प्रतिशत का 2.50 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत का 5 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है.
टीएसपी क्षेत्र में आरक्षण की यह बहस अब सामाजिक न्याय के सवाल से आगे बढ़कर राजनीतिक शक्ति संतुलन का मुद्दा बनती जा रही है. पंचायत चुनाव से पहले इस मुद्दे ने सियासत का तापमान बढ़ा दिया है. अब नजर राज्य सरकार पर है कि वह संवैधानिक दायरे में रहते हुए समाधान निकालती है या फिर यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी आंदोलन बनकर उभरता है.
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