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World Sparrow Day 2025: लंबे समय बाद राजस्थान में फिर गूंजी गौरैया की चहचहाहट, निराशा के बीच शुभ संकेत 

Sparrow Conservation: गौरैया चिड़िया पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वह जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं और पौधों की वृद्धि में मदद करती हैं. अगर गौरैया नहीं बची, तो यह हमारे पारिस्थितिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा होगा.

World Sparrow Day 2025: लंबे समय बाद राजस्थान में फिर गूंजी गौरैया की चहचहाहट, निराशा के बीच शुभ संकेत 
गौरेया

World Sparrow Day Special: एक समय था जब गौरैया चिड़ियां हमारे आंगन और आस-पास भारी संख्या में देखे जाते थे. लेकिन वर्तमान में गौरैया धीरे-धीरे लुप्त होते जा रही है. जिसकी वजह से सरकार को इसे संरक्षित करने की जरूरत पड़ रही है. बता दें कि विश्व गौरैया दिवस हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य तेजी से विलुप्त हो रही गैरेया को बचाना है. पहले शहर से लेकर गांव तक अपनी चहचहाहट बिखेरने वाली यह छोटी सी चिड़िया तेजी से विलुप्त होने की कागार पर आ गई. इसे विलुप्त होता देख भारत नेचर फॉरएवर ने साल 2010 में एक खास पहल की. गैरेया को बचाने की यह पहल अब वैश्विक बन चुकी है. गौरैया के संरक्षण को लेकर एक राहत भरी खबर राजस्थान से सामने आई है. 

एक बार फिर सुनाई दी गौरेया की चहचहाहट  

राजस्थान के गंगापुर सिटी के वजीरपुर उपखंड मुख्यालय सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले एक दशक से घरों के आंगन से गायब हुई गौरैया चिड़िया की चहचहाहट एक बार फिर से सुनाई देने लगी है. एक दशक पहले जिनकी संख्या बहुत कम हो गई थीं और लगभग दिखना ही बंद हो गया था. 

पक्षी प्रेमी मुनेश मीणा ने बताया कि  ग्रामीण इलाकों में विलुप्त हो रही गौरैया चिड़िया फिर से दिखाई देने लगी है , जिससे क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर दिखाई देने लगी है.

जैव विविधता के लिए जरूरी है गौरैया

पक्षी प्रेमियों ने बताया कि गौरैया को शुभ संकेत माना जाता है और माना जाता है कि जिस घर में गौरैया का बसेरा होता है, वहां शांति और समृद्धि होती है. पक्षी प्रेमी मुनेश मीणा के घर आज भी दर्जनों गौरैया दाना पानी खाने-पीने रोज सुबह शाम आती हैं. पक्षी प्रेमी मुनेश मीणा का कहना है कि गौरैया चिड़िया पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वह जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं और पौधों की वृद्धि में मदद करती हैं.

गौरैया नहीं बची तो होगा खतरा

नर गौरैया को चिड़ा और मादा को चिड़िया भी कहते हैं, प्रकृति की सुंदरता को संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है. अगर गौरैया नहीं बची, तो यह हमारे पारिस्थितिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा होगा. इसलिए गौरैया के रहने के लिए अपने घरों में कृत्रिम घोंसले लगाने के साथ ही दिना पानी आदि भी रखना चाहिए , जिससे गौरैया चिड़िया अपने घोंसले बना सके.

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