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This Article is From Sep 11, 2024

Toll Tax New Rule: देश में लागू हुआ नया टोल कलेक्शन सिस्टम, 20 KM तक नहीं देना होगा कोई शुल्क

जीएनएसएस से टोल वसूली का सिस्टम कुछ वक्त पहले एनएच-275-बैंगलुरू-मैसूर हाइवे और एनएच-709-पानीपत-हिसार हाइवे पर ट्रायल के तौर पर लागू किया गया था, जिसके नतीजे बहुत अच्छे रहे थे. इसके बाद केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला किया.

Toll Tax New Rule: देश में लागू हुआ नया टोल कलेक्शन सिस्टम, 20 KM तक नहीं देना होगा कोई शुल्क

Rajasthan News: देश में आज से टोल कलेक्शन के लिए नई व्यवस्था लागू हो गई है. अब अगर आप हाईवे पर सफर कर रहे हैं तो आपकी गाड़ी से टोल अपने आप कट जाएगा. इसके लिए आज से ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) लागू हो गया है जो GPS सिस्टम के तहत चलेगा. इसके लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नियम जारी कर दिए हैं. इसके मुताबिक GNSS से लैस निजी वाहनों को 20 किलोमीटर तक कोई टैक्स नहीं देना होगा. इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. 

किसे और कैसे मिलेगा फायदा?

राष्ट्रीय परमिट रखने वाले वाहनों को छोड़कर अगर दूसरे जीपीएस लागे किसी वाहन का मालिक नेशनल हाइवे के किसी हिस्से का इस्तेमाल करता है तो इससे एक दिन में हर एक दिशा में 20 किलोमीटर तक के सफर पर किसी भी तरह का टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा इस नियम की खास बात ये है कि वाहन ने जितनी दूर तक का सफर किया है, उसे उतनी दूरी तक का टोल ही देना होगा. मगर इसका फायदा उसी गाड़ी को मिल पाएगा जो GNSS से लैस है. इसके वाहन मालिक को अपनी गाड़ी में ऑन-बोर्ड यूनिट-ओबीयू या ट्रैकिंग डिवाइस लगवाना होगा. ये 4 हजार रुपये का उपकरण वाहन मालिक को खुद खरीदना होगा.  फिलहाल ये व्यवस्था हाइब्रिड मोड पर चलेगी यानी कैश, फास्टैग और ऑटोमैटिक नम्बर प्लेट रिकॉग्निशन-एएनपीआर पर काम करेगी.

1 लाख करोड़ बढ़ सकता है रेवेन्यू

जीएनएसएस से टोल वसूली का सिस्टम कुछ वक्त पहले एनएच-275-बैंगलुरू-मैसूर हाइवे और एनएच-709-पानीपत-हिसार हाइवे पर ट्रायल के तौर पर लागू किया गया था, जिसके नतीजे बहुत अच्छे रहे थे. इसके बाद केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला किया. फिलहाल नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इन्डिया को तकरीबन 40 हज़ार करोड़ रुपये का रेवेन्यू टोल के जरिए मिलता है. नया सिस्टम लागू होने के बाद ये बढ़कर 1 लाख, 40 हज़ार करोड़ रुपये होने की उम्मीद है.

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