
राजस्थान सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लाख दावे करें मगर धरातल पर सच्चाई की बानगी गुरुवार को भीलवाड़ा के सालरा गांव में देखने को मिली. गांव का एकमात्र स्कूल आठवीं कक्षा तक है और स्कूल में 108 छात्रों पर मात्र एक शिक्षक लगा हुआ है. सरकार का फोकस नामांकन बढ़ाने और अंग्रेजी माध्यम की स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर हैं. मगर सच्चाई यह है कि स्कूलों में स्टाफ पूरा नहीं है. ऐसे में अंग्रेजी माध्यम का खोला गया महात्मा गांधी विद्यालय खानापूर्ति साबित हो रहा है. करीब 1 साल से ग्रामीण लगातार स्कूल में स्टाफ बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. 1 साल पहले भी इसी स्कूल में ग्रामीणों ने तालाबंदी कर धरना दिया था. तब शिक्षा विभाग में 2 वैकल्पिक शिक्षक लगाकर मामले को निपटाया था.
अब एक बार फिर 1 साल बाद उन वैकल्पिक लगे शिक्षकों को दूसरी जगह स्थानांतरण करने से स्कूल में स्टाफ की फिर कमी हो गई. इसी बात की नाराजगी जताते हुए आज ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला झड़ दिया. बच्चों को साथ लाकर धरने पर बैठ गए. गौरतलब है कि राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी अंग्रेजी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय इसी सत्र से धरातल पर उतारे जा रहे हैं. मगर स्कूलों में स्टाफ की कमी के चलते भीलवाड़ा जिले के करीब एक दर्जन गांवों में अब तक सत्र शुरू होने के साथ ही तालाबंदी और धरने देखने को मिल चुके हैं.
1 शिक्षक वह भी बीएलओ
स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते ग्रामीण अंचल में लगातार ड्रॉपआउट स्टूडेंट का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. पहले ही तो शिक्षकों की कमी से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है. दूसरा शिक्षकों की भी निर्वाचन के काम (बीएलओ) के तौर पर शिक्षकों को लगाने से या तो स्कूल पर ताला लग जाता है या स्कूल उस दिन बच्चों के भरोसे ही चलती है. सालरा गांव में भी ग्रामीणों की नाराजगी प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मौके पहुंचे. वैकल्पिक व्यवस्था का लिखित आदेश देने के बाद ग्रामीण धरना समाप्त करने को राजी हुए.