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Rajasthan: जयपुर में 400 करोड़ के 'डिजिटल सिग्नेचर' की साइबर सेंधमारी, राजस्थान से लेकर दुबई तक जुड़े हैं तार

Rajasthan News: जयपुर साइबर पुलिस ने 400 करोड़ रुपये के डिजिटल सिग्नेचर और DGFT पोर्टल स्कैम का पर्दाफाश किया है. मामले में जोधपुर के पांच जालसाज गिरफ्तार किए गए है. उनके लिंक दुबई और दिल्ली तक फैले हैं.

Rajasthan: जयपुर में 400 करोड़ के 'डिजिटल सिग्नेचर' की साइबर सेंधमारी, राजस्थान से लेकर दुबई तक जुड़े हैं तार
प्रतीकात्म तस्वीर

Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर की साइबर टीम ने देश के सबसे बड़े और अपनी तरह के पहले 'DGFT आईसी गेट स्क्रिप्ट घोटाले' का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में जोधपुर के पांच शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने डिजिटल सेंधमारी कर सरकार और बड़े निर्यातकों (Exporters) को करीब 400 करोड़ रुपये का चूना लगाया है.

कैसे दिया वारदात को अंजाम?

पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुल्तान, नंदकिशोर, निर्मल, अशोक और प्रमोद के रूप में हुई है. ये सभी जोधपुर के निवासी हैं. जांच में सामने आया है कि इन ठगों ने विदेश मंत्रालय के अधीन आने वाले DGFT (Directorate General of Foreign Trade) पोर्टल में तकनीकी खामियों का फायदा उठाया. आरोपियों ने बड़े एक्सपोर्टर्स के फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और डिजिटल सिग्नेचर (DSC) तैयार किए और उनके हिस्से का 400 करोड़ का सरकारी इंसेंटिव (Duty Credit Scrips) अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिया. इस गिरोह के तार  राजस्थान समेत दिल्ली , दुबई के बाद अब गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ते हुए नजर आ रहे हैं.

कैसे करते थे ये काम

इन सभी आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए सबसे पहले नकली डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड किए. फिर पेमेंट के लिए गुजरात और महाराष्ट्र के IP एड्रेस का इस्तेमाल किया. साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि यह गैंग इस काम के लिए 67 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था जिसमें 10 ऑथराइज़्ड कंपनियों से करीब 200 डिजिटल सिग्नेचर लिए थे. इन नकली सिग्नेचर के लिए पेमेंट ज़्यादातर jeffelon222-1@oksbi और 9266780963@ptaxis UPI IDs से किया गया था. 

फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट

फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट
Photo Credit: NDTV

दुबई और कई राज्यों से जुड़े हैं तार

जयपुर पुलिस के अनुसार, इन सभी आरोपियों ने फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड करने के लिए गुजरात और महाराष्ट्र के आईपी एड्रेस का उपयोग किया था. जांच में 67 मोबाइल नंबरों और 200 से अधिक फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का पता चला है, जिनका भुगतान विशेष यूपीआई आईडी (`jeffelon222-1@oksbi` और `9266780963@ptaxis`) के जरिए किया गया था.

बड़ी मिलीभगत की आशंका

जयपुर के स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश ने बताया कि इस खेल में कई परते हैं. आशंका है कि इस महाघोटाले में सरकारी विभागों के उच्च अधिकारी, बैंक कर्मचारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) भी शामिल हो सकते हैं. पुलिस को शक है कि गिरोह ने कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों का भी दुरुपयोग किया है. पुलिस के अनुसार साइबर ठगी के इस अनोखे खेल में कई लेयर है. जयपुर पुलिस ने दावा किया है कि जल्द इसमें सैकड़ों गिरफ्तारियां होगी

क्या है ये 'इंसेंटिव' का खेल?

जब कोई भारतीय व्यापारी विदेश में सामान बेचता है, तो सरकार उसे टैक्स छूट के रूप में RODTEP और ROSCTL जैसी योजनाओं के तहत 'क्रेडिट' देती है. इसे 'ड्युटी क्रेडिट स्क्रिप' कहा जाता है.  इसका उपयोग कस्टम ड्यूटी भरने में होता है. ठगों ने असली निर्यातकों के खातों में सेंध लगाकर इन्हीं 'स्क्रिप्स' को चोरी कर इसकी फायदा उठा लिया. 

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