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Rajasthan: भूरी बेगम हत्याकांड के हत्यारों को मिली ताउम्र जेल की सजा, चांदी के कड़ों के लिए काटा था गला और दोनों पैर

Rajasthan News: 10 साल तक चले भूरी बेगम हत्याकांड में शुक्रवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. 28-29 जून 2014 की रात को भूरी बेगम का गला चांदी के कड़े लूटने के लिए उनके दोनों पैरों को काटकर उनकी हत्या कर दी थी

Rajasthan: भूरी बेगम हत्याकांड के हत्यारों को मिली ताउम्र जेल की सजा, चांदी के कड़ों के लिए काटा था गला और दोनों पैर
भूरी बेगम हत्याकांड के अपराधी
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Bhuri Begum Murder Case: राजस्थान के टोंक जिला मुख्यालय स्थित एडीजे कोर्ट ने दूनी कस्बे के रोंगटे खड़े कर देने वाले भूरी बेगम हत्याकांड' में शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया है. 10 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, कोर्ट ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जबकि इनके एक अन्य साथी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. साथ ही मामले में फरार चल रहे एक और साथी के विरूद्ध अपना फैसला सुरक्षित रखा है.

 चांदी के कड़ों को लूटने के लिए पैरों को दिया था काट 

यह वारदात 28-29 जून 2014 की रात को दूनी कस्बे के वार्ड नंबर 7 में हुई थी. यहा रहने वाली वृद्धा भूरी बेगम अपने घर में सो रही थीं. लुटेरों ने उनके पैरों में पहने चांदी के कड़ों को लूटने की नीयत से उन पर हमला किया. बेरहमी की हदें पार करते हुए बदमाशों ने न केवल भूरी बेगम का गला रेता, बल्कि कड़े निकालने के लिए उनके दोनों पैरों को काटकर उनकी हत्या कर दी. दूनी थाना पुलिस ने सघन जांच के बाद मोग्या गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर इस हत्याकांड का खुलासा किया था.

अदालत का फैसला और सजा

10 साल से टोंक की एडीजे अदालत में चल रही केस की सुनवाई पर शुक्रवार को एडीजे जज महावीर महावर ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों पर गौर करते हुए अपना फैसला सुनाया. जिसमें उन्होंने मोग्या गैंग के दोनों मुख्य अभियुक्तों (सीताराम रामनिवास मोग्या) को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया . वही एक दूसरे हत्यारे अंबालाल मोग्या साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. इसके अलावा एक दूसरे फरार चल रहे आरोपी प्रभु मोग्या को के खिलाफ फैसला सुरक्षित रखा गया है.

10 साल की ट्रायल, 20 गवाह और 42 दस्तावेज

लोक अभियोजक प्रदीप साहू ने बताया कि न्याय के लिए 10 साल चली इस लंबी ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों का गुनाह साबित करने के लिए 20 गवाह और 42 महत्वपूर्ण दस्तावेजअदालत में पेश किए. गौरतलब है कि ये अपराधी आदतन अपराधी हैं और जयपुर के चाकसू व टोंक के कजोड़ी देवी हत्याकांड में भी शामिल रहे हैं.

एडीजे का समाज के लिए संदेश

फैसला सुनाते समय एडीजे महावीर महावर ने समाज और कानून व्यवस्था पर गहरी टिप्पणी की. उन्होंने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सभ्य समाज में ऐसी घटनाएं होना चौंकाने वाला है.  ऐसे मामलों में सिर्फ न्याय मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि न्याय दिखना भी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके.

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