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Barahmasi Gangaur Fair: गणगौर का मेला आज, ब्राह्मण स्वर्णकार समाज में बांटी गई 35 किलो मेंहदी

जूनागढ़ में राजपरिवार की तरफ़ से नारियल, दस रुपए और बूंदी के लड्डुओं से क़रीब 400 गणगौर की खोल भरी जाएगी. इस मौके पर शाम 5 बजे जूनागढ़ के आगे मेला भरेगा. ग़ौरतलब है गणगौर का पूजन रामनवमी से शुरू होता है. 12 महीनों तक व्रत करने के बाद रामनवमी के बाद आने वाली बारह तारीख़ को बारहमासी गणगौर का मेला भरता है.

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Barahmasi Gangaur Fair: गणगौर का मेला आज, ब्राह्मण स्वर्णकार समाज में बांटी गई 35 किलो मेंहदी
गणगौर पूजा में चैत्र मास में पद देना पड़ता है

Bikaner News: बीकानेर में इन दोनों गणगौर का माहौल चल रहा है. कल जब चुनाव थे, तब भी लोगों की ज़ेहन में गणगौर शरीक थी. बीकानेर के बारह गुवाड़ चौक में दो दिवसीय गणगौर का मेला शुरू हुआ. दो दिवसीय गणगौर मेले में आज आलू जी छंगाणी की गवर का मेला भरेगा. प्रसिद्ध साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार बताते हैं कि शादी और वंश की वृद्धि की कामना के लिए बारहमासी गवर का मेला भरा जाता है.

आज मेले की शुरुआत हुई और आसपास के इलाको से युवतियों और महिलाएं पहुंची. उधर बारहमासी गणगौर के लिए ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के घरों में महिलाओं के लिए 35 किलो मेंहदी का वितरण भी किया गया. आज जूनागढ़ में गणगौर की खोल भरी जाएगी. ये एक पुरानी परम्परा है जिसे बीकानेर के राजपरिवार द्वारा सैंकड़ों बरसों से निभाया जा रहा है.

रामनवमी से शुरू होता है गणगौर मेला 

जूनागढ़ में राजपरिवार की तरफ़ से नारियल, दस रुपए और बूंदी के लड्डुओं से करीब 400 गणगौर की खोल भरी जाएगी. इस मौके पर शाम 5 बजे जूनागढ़ के आगे मेला भरेगा. गौरतलब है कि बारहमासी गणगौर का पूजन रामनवमी से शुरू होता है. 12 महीनों तक व्रत करने के बाद रामनवमी के बाद आने वाली बारह तारीख को बारहमासी गणगौर का मेला भरता है.

बड़ पूजन और मांग कर पीते हैं पानी  

राजाराम स्वर्णकार बताते हैं कि बारहमासी गणगौर की पूजा करने वाली महिलाओं को 12 महीनों तक दान देना पड़ता है. इसके अलावा हर माह उन्हें एक चीज का त्याग करना पड़ता है. रामनवमी से शुरू होने वाली गणगौर पूजा में चैत्र मास में पद देना पड़ता है. बैशाख माह में पीपल पूजा होती है. ज्येष्ठ में बड़ पूजन करने के साथ ही मांग कर पानी पीना पड़ता है.

महिलाएं सोती हैं जमीन पर

इसी तरह आषाढ़ में बारहमासी गणगौर की पूजा करने वाली महिला जमीन पर सोती है. सावन के महीने में हरी सब्जी और भादो में दही का त्याग करना पड़ता है. आसोज के महीने में खीर छोड़ना पड़ता है. वहीं कार्तिक मास में तुलसी की पूजा, मार्गशीष में मूंग का त्याग और पौष माह में नमक का त्याग करना पड़ता है. माघ के महीने में घड़े के पानी से स्नान किया जाता है और फाल्गुन में ठाकुरजी के साथ फाग खेला जाता है.

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