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This Article is From Jun 28, 2024

Rajasthan Rains: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में हुई 10 फीसदी से ज्यादा बरसात, फिर भी सूखे रह गए 85 फीसदी जलाश्य

Rajasthan Monsoon Update: चित्तौड़गढ़ के 46 बांधों में से तीन चौथाई से अधिक बांध एकदम सूखे होकर मैदान में तब्दील हो चुके हैं. इनमें सबसे बड़ा बांध गंभीरी है जो कि पेयजल के साथ-साथ एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है. इसके अलावा वागन, ओराई, भूपालसागर सहित 40 बांध की स्थिति गंभीरी जैसी ही है, जहां सरफेस लेवल पर एक बूंद पानी देखने को नहीं मिलता.

Rajasthan Rains: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में हुई 10 फीसदी से ज्यादा बरसात, फिर भी सूखे रह गए 85 फीसदी जलाश्य
Rajasthan Weather: चित्तौड़गढ़ में सूखे पड़े बांध
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पेयजल व भू-जल स्तर की रीढ़ कहे जाने वाले कई जलाशय सूखे पड़े हैं. हालत यह है कि 85% बांधों में एक बूंद तक पानी नहीं है, जबकि शेष में पानी रसातल पर दिखाई दे रहा है. जिले के 46 छोटे बड़े बांधों में 2.76 फीसदी ही पानी बचा है. हालांकि मानसून की बरसात शुरू हो गई है, लेकिन इन बांधों में अभी तक पानी की आवक शुरू नहीं हुई है. इस साल एक जून से 27 जून तक 750 mm बारिश के मुकाबले 78.82 mm यानी औसत की 10.51 फीसदी बारिश हो चुकी है, फिर भी जलाश्य खाली पड़े हैं. 

औसत से ज्यादा बारिश की भविष्यवाणी

मौसम विभाग ने इस बार औसत से अधिक बारिश होने की भविष्यवाणी की है. मानसूनी बरसात से ही जिले के जलाशयों में पानी की आवक हो पाएगी. मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखते हुए सिंचाई विभाग द्वारा प्रमुख बांध तालाबों के गेट का मेंटेनेंस करवा दिया गया है ताकि अतिवृष्टि में बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. जिले के 46 बांधों में से कुछ ही बांधों में पानी भरा है. चित्तौड़गढ़ जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता कार्यालय के अधीन 46 बांध हैं, जबकि जिले का सबसे बड़ा बांध रावतभाटा स्थित राणा प्रताप सागर बांध कोटा जल संसाधन विभाग के अधीन आता है. 

बांधों में तरबूज की खेती कर रहे किसान

चित्तौड़गढ़ के 46 बांधों में से तीन चौथाई से अधिक बांध एकदम सूखे होकर मैदान में तब्दील हो चुके हैं. इनमें सबसे बड़ा बांध गंभीरी है जो कि पेयजल के साथ-साथ एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है. इसके अलावा वागन, ओराई, भूपालसागर सहित 40 बांध की स्थिति गंभीरी जैसी ही है, जहां सरफेस लेवल पर एक बूंद पानी देखने को नहीं मिलता. इनमें से कई बांधों में किसान तरबूज व खरबूज की खेती कर रहे है. केवल आधा दर्जन बांध ऐसे हैं जिनमें पानी जीरो लेवल पर है. यह पानी भी संबंधित क्षेत्र के लोगों के पेयजल के लिए रिजर्व है. 

जानें किस बांध में कितना पानी बचा?

विभाग के अनुसार, बड़गांव बांध की क्षमता 31.49 एमक्यूएम है जिसके मुकाबले वर्तमान में 2.64 एमक्यूएम पानी ही बचा है. इसी प्रकार बस्सी की क्षमता 23.22 के मुकाबले 3.45, ऊँचकिया बांध की क्षमता 5.27 के मुकाबले 2. 04, मातृकुंडिया की 35.64 के मुकाबले 1.72, सोमी की 2.4 के मुकाबले 43 और घोसुंडा बांध की 31.81 एमक्यूएम के मुकाबले दो एमक्यूएम पानी बचा है.

मानसून से पहले बांधों व नहरों के गेटों की ग्रीसिंग 

अधिशासी अभियंता जल संसाधन विभाग के राज कुमार शर्मा ने बताया कि मानसून की बरसात के बाद जलाशयों में पानी की आवक से जिले के सभी छोटे-बड़े बांधों व नहरों के गेटों की सर्विस कर ग्रीसिंग कर दी है. इसका मुख्य उद्देश्य बांध की ओवरफ्लो होने की स्थिति में बांधों के गेट को खोलकर पानी की निकासी की जा सके. इधर, कृषि विभाग भी इस बार अच्छी बारिश को देखते हुए जिले में बुवाई का हेक्टेयर एरिया भी बढ़ा दिया.

सबसे ज्यादा खरीफ की बुवाई का लक्ष्य 

कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार जागा ने बताया कि करीब 3.25 लाख हेक्टर एरिया में खरीफ की बुवाई का लक्ष्य रखा गया. इनमें सर्वाधिक मक्का की बुवाई होगी. दूसरे नंबर पर सोयाबीन की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है. जिले में मानसूनी बरसात के बाद कई किसानों ने खेतों में बुवाई शुरू कर दी है.

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