कोटपूतली के कल्याणपुरा कुहाड़ा गांव स्थित अरावली की पहाड़ियों में श्रीछांपाला वाला भैरवजी का मंदिर है. कल इसके वार्षिकोत्सव पर विशाल मेला, महाभंडारा एवं रात्रि जागरण होगा. इसको लेकर क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह है, और ग्रामीण पिछले एक महीने से व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं. इस बार मेले की सबसे बड़ी विशेषता 651 क्विंटल चूरमे की महाप्रसादी है, जिसे JCB, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और थ्रेसर की मदद से मिलाया जा रहा है. यह मेला प्रदेशभर में अपने अनोखे अंदाज में बनने वाली महाप्रसादी के लिए जाना जाता है.
पिछली बार 551 क्विंटल चूरमा तैयार
पिछली बार 551 क्विंटल चूरमा तैयार किया गया था, जबकि इस बार आस्था के अनुरूप इसे और बढ़ाया गया है. ग्रामीणों ने पूरे मेले का मैनेजमेंट खुद संभाला है. पार्किंग, दर्शन व्यवस्था, हेलीपैड, भीड़ नियंत्रण और सेवाभाव के लिए हजारों स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. करीब 21 स्कूलों के लगभग 5 हजार विद्यार्थी सेवा में लगाए जाएंगे. इसके साथ ही 3 हजार पुरुष और 500 महिलाएं वालंटियर के रूप में अपनी सेवाएं देंगी.
आज 3 किलोमीटर कलश यात्रा निकाली जाएगी
गुरुवार को चोटिया मोड़ से मंदिर परिसर तक करीब 3 किलोमीटर लंबी विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी. इस यात्रा में हजारों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश लेकर गाजे-बाजे के साथ चलेंगी. करीब 25 हजार कलश मंगवाए गए हैं. जगह-जगह ग्रामीण स्वागत करेंगे. मंदिर परिसर में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी, जिसके लिए स्थायी हेलीपैड की व्यवस्था है.
महाप्रसादी की तैयारी में भारी मात्रा में सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल खांड, मावा, ड्रायफ्रूट्स, दूध, दही और दाल सहित बड़ी मात्रा में मसाले शामिल हैं. प्रसादी वितरण के लिए ढाई लाख पत्तल-दोने और चार लाख कप मंगवाए गए हैं.
25 टैंकर के पानी तैनात
पेयजल के लिए 25 टैंकर तैनात रहेंगे. एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाएं भी मौके पर मौजूद रहेंगी. मेले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेन्द्र सिंह करेंगे. गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और तिजारा विधायक महंत बालकनाथ योगी अति विशिष्ट अतिथि रहेंगे. इसके अलावा कई विधायक, पूर्व मंत्री, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और उद्योगपति भी बाबा के दरबार में हाजिरी लगाएंगे.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 116 सीढ़ियां चढ़नी होती है. यहां प्राचीन भैरव बाबा की प्रतिमा के साथ सवाई भोज, शेड माता और हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मेला आस्था और परंपरा का बड़ा केंद्र बन चुका है. ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास, अनुशासन और सेवाभाव के कारण यह मेला प्रदेशभर में मिसाल माना जाता है. पुलिस प्रशासन भी भारी भीड़ को लेकर सतर्क है, और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. कुल मिलाकर, यह वार्षिकोत्सव धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और ग्रामीण सहभागिता का भव्य उदाहरण बनने जा रहा है.
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