जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधानसभा में सरकार को घेरने की रणनीति बनी है. कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि सरकार हर मोड़ पर विफल है और उसके पास जनता के सवालों का कोई जवाब नहीं है. रफीक खान ने कहा कि चाहे शिक्षा का मुद्दा हो, बिजली और पानी से जुड़े सवाल हों या फिर बुनियादी सुविधाओं के विषय हों, सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है. उन्होंने कहा कि मनरेगा के मामले में भी सरकार पूरी तरह विफल है.
उन्होंने SIR को लेकर कहा कि जिस तरह से फॉर्म बांटे गए, उन्हें किसने रिसीव किया, इसका कोई अता-पता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार में ब्यूरोक्रेसी डरी हुई है, और दबाव में काम कर रही है. बैठक में विधायकों ने SIR में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया.
"कांग्रेस के निजी मुद्दे नहीं हैं"
रफीक खान ने कहा कि भाजपा ने मनरेगा की हत्या की है, और कांग्रेस मनरेगा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी. उन्होंने कहा कि मनरेगा का मूल स्वरूप वापस लाया जाएगा, और इस मुद्दे पर सरकार को सदन में घेरा जाएगा. रफीक खान ने कहा कि कांग्रेस जिन मुद्दों को लेकर विधानसभा में जाएगी, वे कांग्रेस के निजी मुद्दे नहीं हैं, बल्कि जनता, आम आदमी और किसानों से जुड़े मुद्दे हैं.
"सरकार के पास कोई उपलब्धि नहीं है"
उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियां और विजन रखा जाता है, लेकिन सरकार के पास न तो कोई उपलब्धि है और न ही कोई विजन है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल का अभिभाषण विपक्ष को संबोधित करने जैसा था, जिससे उसकी गरिमा कम हुई है.
"पिछले बजट में किए गए वादों का क्या हुआ"
रफीक खान ने कहा कि कांग्रेस ने अभिभाषण पर संशोधन प्रस्ताव भी लगाए हैं और सरकार से सवाल किया जाएगा कि पिछले बजट में किए गए वादों का क्या हुआ. उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 लाख घरों में पानी पहुंचाने की बात कही थी, लेकिन आज 10 लाख कनेक्शन भी नहीं दे पाई है और उनमें से अधिकांश वर्क ऑर्डर कांग्रेस सरकार के समय के हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार की परफॉर्मेंस जीरो है. विद्याधर नगर से मेट्रो शुरू करने की घोषणा को दो साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन मेट्रो का कोई काम शुरू नहीं हुआ है. रफीक खान ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर विधानसभा में जनता से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे और सदन को साफ संदेश दे दिया गया है कि मनरेगा में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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