Aashram Bail: दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई में आया. आसाराम की ओर से पेश आवेदन में उनकी अधिक उम्र, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और लगातार जारी इलाज का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट ने मेडिकल आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत को 07 जुलाई 2026 तक अथवा लंबित अपील पर अंतिम फैसला आने तक आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने अदालत को बताया कि आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं तथा वर्ष 2018 में उन्हें दुष्कर्म प्रकरण में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. बचाव पक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पूर्व में भी कई बार उनकी अंतरिम जमानत बढ़ाई जा चुकी है और वर्तमान में वे 29 अक्टूबर 2025 से उपचार के लिए जमानत पर बाहर हैं.
आसाराम के अधिवक्ता ने क्या दी दलील
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उपचार अभी जारी है और जमानत अवधि समाप्त होने की स्थिति में उन्हें दोबारा जेल में सरेंडर करना पड़ेगा, जिससे इलाज प्रभावित हो सकता है. साथ ही अदालत को यह भी बताया गया कि सजा के खिलाफ दायर अपील पर 20 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है.
कोर्ट ने दिया आदेश
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने कहा कि जेल प्रशासन की ओर से आसाराम को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत अवधि को 07 जुलाई 2026 तक बढ़ाने के आदेश जारी किए. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में तय अधिकांश शर्तों को यथावत रखा है, जबकि सुरक्षा निगरानी से जुड़ी एक शर्त में आंशिक राहत दी गई है.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अवधि के दौरान आसाराम केवल चिकित्सा उपचार के उद्देश्य से ही बाहर रहेंगे. उन्हें किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने, सार्वजनिक भीड़ जुटाने अथवा विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी.
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