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Adhik Maas 2026: साल 2026 में 12 नहीं, होंगे 13 महीने! क्या है ये दुर्लभ संयोग और क्यों माना जाता है इसे 'पुरुषोत्तम'मास'

Adhik Maas: अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 यानी अगले साल 17 मई से अधिक मास शुरू होगा, जिसका समापन 15 जून 2026 को होगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह अधिक मास ज्येष्ठ (जेठ) माह में आएगा, जिसके चलते 2026 में दो ज्येष्ठ महीने होंगे. जिसके चलते साल2026 में 12 नहीं 13 महीने होंगे. तो चलिए आइए जानते हैं कि यह अधिक मास आखिर क्यों लगता है और क्या है इसके पीछे का कारण.

Adhik Maas 2026: साल 2026 में 12 नहीं, होंगे 13 महीने! क्या है ये दुर्लभ संयोग और क्यों माना जाता है इसे 'पुरुषोत्तम'मास'
Adhik Maas 2026

Adhik Maas 2026: साल 2026 शुरू होने में अब केवल एक महीना ही शेष है. ऐसे में हर कोई नए साल का स्वागत करने के लिए प्लान बनाने लगे है. लेकिन क्या आप जानते है आने वाला साल बहुत ही विशेष होने वाला है,  क्योंकि साल 2026 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस समय विक्रम संवत 2082 चल रहा है लेकिन साल 2026 में यह संवत् बदलकर 2083 का हो जाएगा, जिसके अनुसार इस महीने में अधिका मास (Adhik Maas 2026) लगेगा. जिसके तहत हिंदी कैलेंडर (Hindu calender) के अनुसार साल में फिर 12 नहीं 13 महीने होंगे. यह दुर्लभ संयोग 'अधिक मास' के रूप में बन रहा है, जिसे'पुरुषोत्तम मास' या 'मलमास' (Malmas 2026) भी कहा जाता है.

कब से कब तक रहेगा अधिक मास 2026?

यह महीना भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी बेहद पवित्र माना गया है, और करीब 32 महीने बाद यह योग बनता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, साल 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ (जेठ) माह में लगेगा, जिससे इस बार दो ज्येष्ठ महीने होंगे. अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का प्रारंभ 17 मई 2026 से शुरू होगा. इस अतिरिक्त महीने के कारण, 2026 में ज्येष्ठ माह की कुल अवधि लगभग 58-59 दिनों की होगी.

 क्यों आता है अधिक मास?

अधिक मास आने के पीछे का कारण सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष की गणना में संतुलन बिठाना है. सूर्य वर्ष में यह लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है. साथ ही चंद्र वर्ष में यह लगभग 354 दिनों का होता है. दोनों सालों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यदि इस अंतर को न भरा जाए, तो हर साल त्योहारों की तिथियां बदलती रहेंगी और मौसम के साथ उनका तालमेल बिगड़ जाएगा. इसी अंतर को हर 32 महीने 16 दिन बाद अनूकूल करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ दिया जाता है. यही अतिरिक्त महीना अधिक मास कहलाता है.

क्यों माना जाता है इसे 'पुरुषोत्तम मास'?

जब यह अतिरिक्त महीना आता है  तो कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था, क्योंकि ज्योतिष में इसे 'मलमास' (मलिन महीना) कहकर त्याग दिया गया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, तब इस असहाय मास ने भगवान विष्णु से गुहार लगाई. तब  विष्णु जी ने स्वयं इस महीने का स्वामित्व होना स्वीकार किया और इसे अपना ही नाम दिया जिससे यह'पुरुषोत्तम' (जो सभी पुरुषों में उत्तम हो)मास के रुप में भी जाने लगा. 

 पुरुषोत्तम मास का महत्व

इस महीने में जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठान का अनंत फल मिलता है. मान्यता है कि इस दौरान किया गया पुण्यकर्म अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक लाभ देता है. इस पूरे महीने भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) की पूजा-आराधना, भागवत कथा का श्रवण और उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए. वस्त्र, अन्न, और विशेष रूप से दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. लेकिन इस महीने में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नया व्यापार शुरू करना जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान और व्रत-उपवास करना सबसे उत्तम होता है.

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