अजमेर पुलिस अधीक्षक (SP) वंदिता राणा ने केकड़ी के हेड कांस्टेबल राजेश मीणा के निलंबन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने NDTV से बताया कि ब्यावर सिटी थाना क्षेत्र में राजकीय अस्पताल के बाहर हेड कांस्टेबल राजेश मीणा और ओमप्रकाश गुर्जर के बीच विवाद हुआ था. आरोप है कि इस दौरान राजेश मीणा ने सरकारी रिवॉल्वर निकालकर ओमप्रकाश गुर्जर और अन्य व्यक्तियों पर तान दी थी. झगड़े में ओमप्रकाश सहित कुछ अन्य लोगों को चोटें आईं, उनके वाहन में भी तोड़फोड़ किए जाने के आरोप लगाए गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए हेड कांस्टेबल को निलंबित किया गया है, और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है.
बजरी खनन प्रकरण से इनकार
एसपी वंदिता राणा ने NDTV से कहा कि हेड कांस्टेबल राजेश मीणा और ओमप्रकाश गुर्जर के बीच हुए इस झगड़े को बजरी खनन के प्रकरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि राजेश मीणा 5 जनवरी की रात ड्यूटी ऑफिसर थे, इसके बावजूद वह सरकारी रिवॉल्वर लेकर निजी व्यक्तियों के साथ एक निजी वाहन में घूम रहे थे, जो नियमों के खिलाफ है. इसी दौरान उनका विवाद हुआ.
बजरी खनन के मामले में केकड़ी सदर थाना पुलिस ने माइनिंग विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया था. जांच में माइनिंग अधिकारियों ने बताया कि जिस स्थान से बजरी निकाली जा रही थी, वह नियमानुसार लीज पर दी गई भूमि है.
राजनीतिक बयानबाजी तेज
पूरे मामले को लेकर अब राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी हमलावर हो गए हैं, और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि, एसपी वंदिता राणा ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है, और चाहे पुलिसकर्मी हो या आम नागरिक, नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई तय है.
"खनन और झगड़ा दोनों अलग मामले हैं"
उन्होंने दोहराया कि पुलिसकर्मी और आम लोगों के बीच हुआ झगड़ा एक विषय है, जबकि बजरी खनन का मामला पूरी तरह अलग है. दोनों मामलों में तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है, और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जाएगा.
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