Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर में अस्पताल के बाहर मारपीट और पिस्टल दिखाकर दहशत फैलाने वाले हेड कॉन्स्टेबल पर गाज गिर गई. हेड कॉन्स्टेबल के निलंबन के बाद पुलिस महकमे और स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि से जुड़े मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती. वहीं, निलंबित होने वाले हेड कॉन्स्टेबल ने इसे साजिश का शिकार बताया है.
वर्दी में पुलिसकर्मी ने दिखाया रौब
जानकारी के अनुसार, सोमवार रात केकड़ी सिटी थाना क्षेत्र में राजकीय अस्पताल के बाहर थड़ी पर हुए विवाद ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया. पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान एक पुलिसकर्मी ने वर्दी का रौब दिखाते हुए मारपीट की और हथियार निकालकर डराने का प्रयास किया. अगले दिन शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली. इसके बाद विभागीय स्तर पर त्वरित निर्णय लेते हुए हेड कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया.
निलंबन के बाद सामने आए राजेश मीणा के वायरल वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया. वीडियो में मीणा खुद को साजिश का शिकार बताते हुए अवैध बजरी खनन से जुड़ी कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं. उनका दावा है कि खनन माफिया के खिलाफ की गई सख्ती के कारण उन पर दबाव बनाया गया और झूठे आरोप लगवाए गए. इस बयान के सामने आने के बाद मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित न रहकर अवैध खनन और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों तक जा पहुंचा है.
थाना प्रभारी ने आरोपों को किया खारिज
वहीं सदर थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद चौधरी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और शिकायत के आधार पर की गई है. जब्त वाहनों को लेकर नियमानुसार खनिज विभाग को सूचना दी गई और किसी प्रकार का दबाव नहीं था. फिलहाल एक ओर जहां हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ आपराधिक जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय जांच भी शुरू हो चुकी है.
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